ऊपरी रेणुका और धारटी बेल्ट में पकड़ बनाने वाला आरएसएस पृष्ठभूमि का संभावित चेहरा बन सकता है गेम चेंजर
नाहन/श्री रेणुका जी
सिरमौर जिला की श्री रेणुका जी विधानसभा सीट वर्षों से भाजपा के लिए एक राजनीतिक पहेली बनी हुई है। संसदीय चुनावों में मजबूत बढ़त दिलाने वाला यही क्षेत्र जब विधानसभा चुनाव आता है तो पार्टी के हाथ से फिसल जाता है।
संगठनात्मक मजबूती, वैचारिक आधार और स्थायी जनसमर्थन के बावजूद बार-बार हार का कारण विरोधी लहर नहीं बल्कि रणनीतिक चूकें, टिकट चयन और क्षेत्रीय संतुलन की अनदेखी मानी जाती रही हैं। 2027 के चुनाव नजदीक आते ही इस सीट को लेकर पार्टी के भीतर मंथन तेज है।
श्री रेणुका जी का चुनावी व्यवहार स्पष्ट संकेत देता है कि भाजपा का आधार कमजोर नहीं है। लोकसभा चुनावों में यहां से पार्टी को जिले की अन्य सीटों की तुलना में बेहतर लीड मिलती है।
लेकिन विधानसभा चुनावों में समीकरण बदल जाते हैं। इसका कारण केवल कांग्रेस की मजबूती नहीं, बल्कि क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व की राजनीति और उम्मीदवार चयन को लेकर स्थानीय मनोविज्ञान भी है।
इस विधानसभा क्षेत्र की राजनीतिक संरचना चार प्रमुख भौगोलिक बेल्टों में बंटी हुई है और यही विभाजन चुनावी परिणामों को प्रभावित करता है। महल क्षेत्र की 8 पंचायतों और नौहराधार क्षेत्र की 16 पंचायतों में वर्ष 2002 से भाजपा लगातार बढ़त बनाती रही है।
भारती धार क्षेत्र की 8 पंचायतों में मुकाबला संतुलित रहता है। इसके विपरीत संगड़ाह क्षेत्र की 23 पंचायतें कांग्रेस का मजबूत गढ़ मानी जाती हैं, जहाँ से कांग्रेस प्रत्याशी निर्णायक बढ़त हासिल करते रहे हैं।
यही वह बिंदु है जहाँ भाजपा की रणनीति बार-बार उलझती रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी ने अक्सर उन्हीं पंचायतों में सेंध लगाने की रणनीति बनाई जहाँ कांग्रेस पहले से मजबूत रही, जबकि अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों को संगठित और विस्तार देने पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।
स्थानीय राजनीतिक चर्चाओं में यह भावना भी उभरकर सामने आती रही है कि उम्मीदवार चयन बार-बार संगड़ाह क्षेत्र तक सीमित रहा, जबकि ऊपरी रेणुका और धारटी बेल्ट के मतदाताओं को प्रतिनिधित्व से वंचित होने का एहसास हुआ।
विनय कुमार की मजबूत पंचायतों को छोड़ दें तो शेष क्षेत्रों में लंबे समय से यह सवाल उठता रहा है कि नेतृत्व एक ही भौगोलिक क्षेत्र तक क्यों सीमित रहे।
यहीं से एक नए संभावित चेहरे की चर्चा जोर पकड़ती है। राजनीतिक समीकरणों पर नजर रखने वाले स्थानीय रणनीतिकार मानते हैं कि यदि ऐसा उम्मीदवार सामने आता है जिसकी पकड़ ऊपरी रेणुका क्षेत्र और धारटी बेल्ट दोनों में हो, तो चुनावी समीकरण बदल सकते हैं।
धारटी क्षेत्र की 8 पंचायतें, महल क्षेत्र की 8 पंचायतें और नौहराधार क्षेत्र की 16 पंचायतें मिलकर एक मजबूत आधार तैयार करती हैं, जो संगड़ाह क्षेत्र की बढ़त को संतुलित करने की क्षमता रखता है।
भाजपा के भीतर चर्चा में चल रहा एक संभावित चेहरा, जिसकी पृष्ठभूमि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ी बताई जाती है, इस संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। संगठनात्मक अनुभव, वैचारिक स्वीकार्यता और जमीनी संपर्क का संयोजन उसे अन्य संभावित दावेदारों से अलग पहचान देता है।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि ऐसा चेहरा क्षेत्रीय असंतुलन की धारणा समाप्त कर सकता है और ऊपरी क्षेत्र, धारटी बेल्ट तथा पारंपरिक भाजपा समर्थक पंचायतों को एकजुट करने में सक्षम हो सकता है।
इस सीट पर जातीय और सामाजिक समीकरण भी निर्णायक भूमिका निभाते हैं। राजपूत और ओबीसी समुदाय के साथ-साथ अनुसूचित जाति वर्ग का प्रभाव कई पंचायतों में चुनावी परिणामों को प्रभावित करता है।
बाहाण (ओबीसी), राजपूत, कोली, चमार, डोम, बढ़ई, टाकी, लौहार, सुनार और अन्य पारंपरिक समुदायों की उपस्थिति सामाजिक संतुलन को महत्वपूर्ण बनाती है।
ऐसा उम्मीदवार जो जातीय सीमाओं से ऊपर उठकर व्यापक सामाजिक स्वीकार्यता प्राप्त कर सके, उसे स्वाभाविक बढ़त मिल सकती है।
पिछले चुनावी परिणाम भी संकेत देते हैं कि भाजपा की हार निर्णायक जनाधार के अभाव से नहीं, बल्कि रणनीतिक त्रुटियों से जुड़ी रही है। 2012 में मुकाबला बेहद करीबी रहा। 2017 में हार का अंतर बढ़ा, जबकि 2022 में परिणाम फिर बेहद कम अंतर पर सिमट गया।
इससे स्पष्ट होता है कि सही रणनीति और संतुलित उम्मीदवार चयन पार्टी को जीत के करीब ला सकता है।
2027 का चुनाव भाजपा के लिए केवल एक सीट जीतने का सवाल नहीं, बल्कि रणनीतिक पुनर्संतुलन की परीक्षा भी होगा।
यदि पार्टी संगड़ाह क्षेत्र में सेंध लगाने की पुरानी रणनीति पर अड़ी रहती है, तो परिणामों में बड़ा बदलाव मुश्किल होगा। लेकिन यदि वह अपने मजबूत क्षेत्रों की किलेबंदी करते हुए ऊपरी रेणुका और धारटी बेल्ट में स्वीकार्य नए चेहरे पर दांव खेलती है, तो यह सीट लंबे समय बाद राजनीतिक परिवर्तन का साक्षी बन सकती है।
स्थानीय स्तर पर राजनीतिक संदेश स्पष्ट है — श्री रेणुका जी में जीत का रास्ता विरोधी के गढ़ से नहीं, बल्कि अपने आधार को संगठित करने और प्रतिनिधित्व के संतुलन से होकर गुजरता है। 2027 से पहले भाजपा किस दिशा में कदम बढ़ाती है, यही इस सीट का भविष्य तय करेगा।

