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अडानी एग्री फ्रेश का हिमाचल में विस्तार, सेब के बाद अब चेरी और अन्य स्टोन फ्रूट की भी होगी खरीद

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन2 • 9 May 2026 • 1 Min Read

अडानी एग्री फ्रेश लिमिटेड ने हिमाचल प्रदेश में अपने कृषि कारोबार का विस्तार करते हुए अब स्टोन फ्रूट श्रेणी में प्रवेश करने की घोषणा की है। कंपनी अब सेब के बाद चेरी और अन्य स्टोन फ्रूट की खरीद शुरू करने की योजना पर काम कर रही है, जिससे किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध होने की संभावना है।

लखनऊ

स्टोन फ्रूट श्रेणी में कंपनी का विस्तार

अडानी इंटरप्राइजेज की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी अडानी एग्री फ्रेश लिमिटेड (एएएफएल) ने स्टोन फ्रूट श्रेणी में विस्तार की घोषणा की है। कंपनी के अनुसार अब हिमाचल प्रदेश में चेरी की खरीद शुरू की जाएगी और इसके साथ ही आड़ू तथा प्लम जैसे अन्य स्टोन फ्रूट्स में भी धीरे-धीरे विस्तार किया जाएगा। इस कदम का उद्देश्य फलों की स्टोरेज क्षमता को मजबूत करना और किसानों को संगठित बाजार उपलब्ध कराना है।

फ्रूट होराइजन 2026 कार्यक्रम में दिया गया बयान

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर), उत्तर प्रदेश स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन और बागवानी विभाग द्वारा 7 मई को आयोजित ‘फ्रूट होराइजन 2026: ग्लोबलाइजिंग इंडियाज फ्रूट वैल्यू चेन’ कार्यक्रम में कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मनीष अग्रवाल ने इस विस्तार योजना पर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कंपनी आने वाले सीजन से चेरी की खरीद शुरू करेगी और धीरे-धीरे अन्य स्टोन फ्रूट्स जैसे आड़ू और प्लम में भी विस्तार किया जाएगा।

स्टोरेज और सप्लाई चेन को मजबूत करने पर फोकस

कंपनी ने बताया कि हिमाचल प्रदेश में मौजूद छह स्थानों पर स्थापित कंट्रोल्ड एटमॉस्फियर स्टोरेज सुविधाओं को चेरी के भंडारण और वितरण के लिए आधुनिक बनाया जा रहा है। इससे फलों की गुणवत्ता बनाए रखने और उन्हें लंबे समय तक सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी। यह व्यवस्था किसानों की उपज को बड़े बाजारों तक पहुंचाने में सहायक होगी।

सेब खरीद से मजबूत हुआ नेटवर्क

अडानी एग्री फ्रेश हिमाचल प्रदेश में सेब की खरीद, भंडारण और विपणन करने वाली शुरुआती संगठित कंपनियों में शामिल रही है। कंपनी वर्ष 2006 से अब तक 17,000 से अधिक किसानों से तीन लाख टन से ज्यादा सेब खरीद चुकी है और लगभग 1,500 करोड़ रुपये का सीधा भुगतान कर चुकी है। राज्य में कंपनी ने करीब 25,000 टन भंडारण क्षमता विकसित की है, जिससे फलों के सुरक्षित भंडारण और वितरण में मदद मिल रही है।

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