अब खेती के साथ बिजली भी बनाएंगे प्रदेश के किसान, एग्री फोटोवोल्टिक तकनीक से बढ़ेगी अतिरिक्त आय
प्रदेश के किसानों के लिए खेती को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में नई पहल की जा रही है। अब किसान खेतों में फसल उत्पादन के साथ उसी भूमि से सौर ऊर्जा के जरिए बिजली भी तैयार कर सकेंगे। इसी उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) सिरमौर में सोमवार को एग्री फोटोवोल्टिक (कृषि-सौर ऊर्जा) प्रणाली पर जागरूकता कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें किसानों को इस तकनीक के लाभ और उपयोग की जानकारी दी गई।
नाहन
भारतीय कृषि कौशल परिषद (एएससीआई), नई दिल्ली के सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से करीब 50 प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया। विशेषज्ञों ने बताया कि एग्री फोटोवोल्टिक प्रणाली भविष्य की खेती का प्रभावी मॉडल बन सकती है, जिसमें एक ही खेत से फसल उत्पादन के साथ सौर ऊर्जा के माध्यम से बिजली भी तैयार की जा सकती है। इससे किसानों को आय के दो स्रोत प्राप्त होंगे और खेती अधिक लाभकारी बन सकेगी।
खेती और ऊर्जा का संतुलित मॉडल
कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए कृषि विज्ञान केंद्र सिरमौर के प्रभारी वैज्ञानिक डॉ. पंकज मित्तल ने कहा कि एग्री फोटोवोल्टिक तकनीक खेती को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इस प्रणाली में खेतों में सौर पैनल इस प्रकार लगाए जाते हैं कि फसलों की वृद्धि प्रभावित नहीं होती, जबकि उसी भूमि से स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन भी लगातार होता रहता है। उन्होंने कहा कि किसान अपनी जरूरत की बिजली स्वयं तैयार करने के साथ अतिरिक्त बिजली बेचकर आय का नया स्रोत भी विकसित कर सकते हैं।
जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से भी मिलेगी राहत
डॉ. पंकज मित्तल ने कहा कि बदलते जलवायु परिदृश्य और बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं को देखते हुए यह तकनीक प्रदेश के किसानों के लिए नई संभावनाएं लेकर आई है। उन्होंने बताया कि सरकार भी सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएं चला रही है और भविष्य में इसका लाभ अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
अन्य राज्यों में सफल साबित हो रहा मॉडल
भारतीय कृषि कौशल परिषद के वरिष्ठ विशेषज्ञ रिचर्ड मनु और रवि दहिया ने बताया कि राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और हरियाणा जैसे राज्यों में यह मॉडल सफलतापूर्वक अपनाया जा चुका है। सौर पैनलों के कारण खेतों में तापमान नियंत्रित रहता है, नमी का संरक्षण होता है तथा फसलों को अत्यधिक गर्मी, भारी वर्षा और पाले जैसी परिस्थितियों से भी राहत मिलती है। कार्यशाला के दौरान किसानों ने तकनीक से जुड़े विभिन्न प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने विस्तार से उत्तर दिया और भविष्य में तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया।