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AI LAW / सरकार एआई के लिए ला सकती है नया कानून, डीपफेक समेत कई चुनौतियों पर होगी नजर

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन II • 5 Hours Ago • 1 Min Read

AI LAW : भारत सरकार कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से जुड़े संभावित जोखिमों के मद्देनजर नए कानूनी ढांचे पर विचार कर रही है। प्रस्तावित कानून में डीपफेक, ऑनलाइन धोखाधड़ी, प्राइवेसी, कॉपीराइट और एआई की जवाबदेही जैसे विषयों को शामिल किया जा सकता है।

नई दिल्ली

सरकार नए एआई कानून पर कर रही है विचार

केंद्र सरकार एआई के बढ़ते उपयोग और उससे जुड़े जोखिमों को देखते हुए नए कानून पर विचार कर रही है। प्रस्तावित कानून में सोशल मीडिया और साइबर स्पेस में एआई के दुरुपयोग को रोकने के लिए प्रावधान किए जा सकते हैं। इसमें डीपफेक, ऑनलाइन स्कैम, प्राइवेसी, कॉपीराइट और एआई सिस्टम से होने वाले नुकसान की जिम्मेदारी तय करने जैसे विषय शामिल हो सकते हैं। आईटी मंत्रालय का कहना है कि मौजूदा नियम कुछ मामलों को कवर करते हैं, लेकिन एआई से जुड़े नए मुद्दे लगातार सामने आ रहे हैं।

नए कानून की जरूरत क्यों महसूस हो रही है

रिपोर्ट्स के अनुसार सरकार का मानना है कि मौजूदा कानून मानव व्यवहार को ध्यान में रखकर बनाए गए थे और इनमें एआई के काम करने के तरीके को शामिल नहीं किया गया है। आईटी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि वर्तमान कानून डीपफेक और कंटेंट लेबलिंग जैसे कुछ मामलों को संभाल सकते हैं, लेकिन एआई से जुड़े सभी जोखिमों के लिए पर्याप्त नहीं हैं। उन्होंने कहा कि सरकार एआई के लिए कानूनी ढांचा तैयार करने को लेकर विशेषज्ञों से चर्चा कर रही है।

जवाबदेही को लेकर स्पष्टता नहीं

मौजूदा कानूनों में यह स्पष्ट नहीं है कि एआई से किसी प्रकार की गलती होने पर जिम्मेदारी किसकी होगी। उदाहरण के तौर पर यदि सेल्फ-ड्राइविंग कार से दुर्घटना हो जाए या एआई रोबोट सर्जरी के दौरान कोई गड़बड़ी हो, तो वर्तमान कानून यह स्पष्ट नहीं करते कि इसके लिए कंपनी, उपयोगकर्ता या किसी अन्य पक्ष को जिम्मेदार माना जाएगा। इसी तरह कॉपीराइट और डेटा से जुड़े मामलों में भी स्पष्टता की आवश्यकता है।

डीपफेक को लेकर भी विचार

सरकार डीपफेक वीडियो और क्लोन वॉइस तैयार करने में एआई के उपयोग को लेकर भी विचार कर रही है। डीपफेक वीडियो और ऑडियो क्लोन के माध्यम से धोखाधड़ी और पहचान से जुड़े जोखिम बढ़ सकते हैं। ऐसा कंटेंट सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो सकता है और कई मामलों में कार्रवाई से पहले ही बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंच जाता है।

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