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AIIMS/ बिलासपुर में लगेगी अत्याधुनिक वाइटेक 2 कांपेक्ट मशीन, संक्रमण जांच प्रक्रिया होगी तेज

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन2 • 9 Hours Ago • 1 Min Read

AIIMS: बिलासपुर के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में जल्द ही वाइटेक 2 कांपेक्ट मशीन स्थापित की जाएगी। संस्थान के अनुसार इस मशीन के माध्यम से संक्रमण पैदा करने वाले बैक्टीरिया और फंगस की पहचान पहले की तुलना में कम समय में की जा सकेगी। साथ ही संक्रमण के उपचार के लिए उपयुक्त एंटीबायोटिक दवाओं के चयन में भी सहायता मिलेगी।

बिलासपुर

संक्रमण की पहचान में लगेगा कम समय

वर्तमान में संक्रमण से संबंधित मामलों में बैक्टीरिया या फंगस की पहचान करने तथा यह निर्धारित करने के लिए कि कौन-सी एंटीबायोटिक दवा प्रभावी होगी, कल्चर आधारित जांच की जाती है। इस प्रक्रिया में सामान्यतः 48 से 72 घंटे या कई मामलों में इससे अधिक समय भी लग सकता है। इस दौरान चिकित्सकों को मरीज की स्थिति और उपलब्ध क्लीनिकल संकेतों के आधार पर प्रारंभिक उपचार शुरू करना पड़ता है। एम्स बिलासपुर में वाइटेक 2 कांपेक्ट मशीन स्थापित होने के बाद संक्रमण पैदा करने वाले सूक्ष्मजीवों की पहचान अपेक्षाकृत कम समय में की जा सकेगी। इससे चिकित्सकों को संक्रमण की प्रकृति समझने और उपचार संबंधी निर्णय अधिक सटीक तरीके से लेने में सहायता मिलेगी।

दो प्रमुख कार्य करेगी मशीन

वाइटेक 2 कांपेक्ट एक ऑटोमेटेड माइक्रोबायोलॉजी सिस्टम है, जिसका उपयोग मरीजों के रक्त, मूत्र, पस तथा अन्य जैविक नमूनों में मौजूद बैक्टीरिया और फंगस की पहचान के लिए किया जाता है। मशीन का पहला प्रमुख कार्य संक्रमण पैदा करने वाले सूक्ष्मजीव की सटीक पहचान करना है। दूसरा कार्य एंटीबायोटिक ससेप्टिबिलिटी टेस्टिंग (AST) करना है, जिसके माध्यम से यह पता लगाया जाता है कि संबंधित बैक्टीरिया पर कौन-सी एंटीबायोटिक दवा प्रभावी होगी और किन दवाओं के प्रति वह प्रतिरोध विकसित कर चुका है। यह पूरी प्रक्रिया कंप्यूटर आधारित स्वचालित तकनीक पर आधारित होती है, जिससे परीक्षण की गति और सटीकता दोनों में सुधार होता है।

गंभीर संक्रमण वाले मरीजों को मिल सकता है लाभ

विशेषज्ञों के अनुसार सेप्सिस (रक्त संक्रमण), यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI), गंभीर निमोनिया, मेनिन्जाइटिस तथा अन्य जटिल संक्रमणों के मामलों में समय पर सही उपचार अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। ऐसे मामलों में संक्रमण की पहचान और उपयुक्त एंटीबायोटिक के चयन में देरी मरीज की स्थिति को प्रभावित कर सकती है। नई मशीन के माध्यम से संक्रमण के लिए जिम्मेदार सूक्ष्मजीव और उसके उपचार के लिए उपयुक्त दवा की जानकारी अपेक्षाकृत कम समय में उपलब्ध हो सकेगी। इससे चिकित्सकों को लक्षित उपचार शुरू करने में सहायता मिलेगी और अनावश्यक या व्यापक स्पेक्ट्रम एंटीबायोटिक दवाओं के उपयोग को कम करने की दिशा में भी मदद मिल सकती है।

प्रदेश के मरीजों को स्थानीय स्तर पर मिलेगी सुविधा

हिमाचल प्रदेश के भौगोलिक दृष्टि से दूरस्थ और पर्वतीय क्षेत्रों से आने वाले मरीजों के लिए उन्नत माइक्रोबायोलॉजी जांच सुविधाओं तक पहुंच हमेशा एक चुनौती रही है। अब तक कई मामलों में मरीजों को इस प्रकार की विशेष जांच के लिए प्रदेश से बाहर स्थित बड़े चिकित्सा संस्थानों या निजी स्वास्थ्य केंद्रों का सहारा लेना पड़ता था। एम्स बिलासपुर में वाइटेक 2 कांपेक्ट मशीन उपलब्ध होने के बाद राज्य के भीतर ही आधुनिक संक्रमण जांच सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। इससे मरीजों को जांच के लिए अतिरिक्त यात्रा और समय की आवश्यकता कम होगी, वहीं चिकित्सकों को भी उपचार संबंधी निर्णय लेने के लिए आवश्यक रिपोर्ट अपेक्षाकृत जल्दी प्राप्त हो सकेगी।

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