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जब प्याऊ सूख गए तो अंजुमन आई आगे, प्यासे बेजुबानों के लिए उठाया इंसानियत का कदम

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन • 1 Hour Ago • 1 Min Read

नाहन शहर में भीषण गर्मी के बीच बेसहारा पशु पानी की तलाश में भटक रहे हैं। इसी बीच अंजुमन इस्लामिया ने बेजुबानों के लिए पानी के ड्रम लगाने और पुरानी बावड़ियों को फिर से चालू करने की पहल शुरू की है।

नाहन

नाहन शहर में इन दिनों भीषण गर्मी के बीच एक तस्वीर लगातार सवाल खड़े कर रही है। एक तरफ मंचों से गौ सेवा, पशु संरक्षण और जीव दया के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी तरफ शहर की सड़कों पर बेसहारा पशु पानी की तलाश में भटकते नजर आ रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि दोपहर की तपिश में सड़कें तप रही हैं और बेजुबान गलियों, चौराहों और बाजारों में पानी की एक बूंद के लिए भटकने को मजबूर हैं।

शहर में घूम रहे पशुओं की स्थिति लगातार चिंता बढ़ा रही है। बंदर घरों की छतों पर रखी पानी की टंकियों तक पहुंचने लगे हैं, जबकि सड़कों पर घूमने वाले बेसहारा पशु और आवारा कुत्तों के लिए हालात और अधिक चुनौतीपूर्ण बन गए हैं। भीषण गर्मी में पानी की कमी अब केवल व्यवस्था का नहीं बल्कि गंभीर चिंता का विषय बनती दिखाई दे रही है।

विडंबना यह भी है कि जिस नाहन को कभी जल स्रोतों और तालाबों का शहर कहा जाता था, वहीं आज बेजुबानों के लिए पानी की व्यवस्था लगभग खत्म होती नजर आ रही है। रियासत काल के दौरान कच्चा जोहड़, रानी ताल, जमा मस्जिद क्षेत्र और विला राउंड के आसपास ऐसे पशु प्याऊ बनाए गए थे जहां हर समय पशुओं के लिए पानी उपलब्ध रहता था। समय के साथ यह व्यवस्था या तो सूख गई या उपेक्षा की भेंट चढ़ गई।

इसी बीच शहर में समाधान की पहल भी सामने आने लगी है। अंजुमन इस्लामिया ने बेजुबानों की प्यास को लेकर आगे कदम बढ़ाया है। अंजुमन इस्लामिया के अध्यक्ष बॉबी अहमद ने कहा कि आगामी दो दिनों के भीतर शहर के प्रमुख स्थानों पर पशुओं के लिए पानी के ड्रम लगाए जाएंगे, ताकि गर्मी के मौसम में बेसहारा पशुओं को राहत मिल सके।

इसी कड़ी में शहर के प्रबुद्ध जनों में शुमार मोहम्मद साबिर फुल्लू भाईजान ने भी आगे आते हुए कहा कि बस स्टैंड के समीप स्थित करीब 40 वर्षों से बंद पड़ी रियासतकालीन कच्चा जोहड़ बावड़ी की सफाई कर उसमें दोबारा पानी भरने का प्रयास किया जाएगा, ताकि शहर के बेसहारा पशु वहां अपनी प्यास बुझा सकें।

नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी संजय कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि शहर की बंद पड़ी बावड़ियों और पुराने पशु प्याऊ का निरीक्षण किया जाएगा। यदि वे उपयोग योग्य पाए जाते हैं तो वहां पानी की व्यवस्था बहाल करने की दिशा में कार्य किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बेसहारा पशुओं के लिए पीने के पानी की व्यवस्था सुनिश्चित करने के हर संभव प्रयास किए जाएंगे।

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