हिमाचल और उत्तराखंड की सीमा पर स्थित आसन बैराज इन दिनों विदेशी और रंग-बिरंगे प्रवासी पक्षियों से भरा हुआ है। सर्दियों के मौसम में यह बैराज साइबेरिया, चीन, और कजाकिस्तान से आए सैकड़ों जल पक्षियों का पसंदीदा ठिकाना बन चुका है।
सर्दियों में पक्षियों का स्वर्ग
आसन बैराज में अक्टूबर से मार्च तक प्रवासी पक्षियों का आना-जाना लगा रहता है।
- प्रमुख आगमन: साइबेरिया से सुरखाब समेत आधा दर्जन से अधिक प्रजातियों के जल पक्षी यहां डेरा डालते हैं।
- विशेष आकर्षण: ये पक्षी वेटलैंड में अंडे देते हैं और कई प्रजातियां यहां लंबे समय तक रहती हैं।
- स्थायी प्रवासी: कुछ पक्षी, विशेष रूप से जो अंडे देते हैं या देर से पहुंचते हैं, वे पूरे साल बैराज में रह जाते हैं।
पक्षियों की सुरक्षा के लिए खास इंतजाम
आसन बैराज पर प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।
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- कुल कैमरे: बैराज क्षेत्र में 13 सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था है।
- 24×7 निगरानी: इन कैमरों के माध्यम से पक्षियों की सुरक्षा और गतिविधियों पर नजर रखी जाती है।
- स्थानीय प्रयास: अधिकारियों और वेटलैंड प्रबंधन द्वारा पक्षियों की देखभाल और सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है।
वेटलैंड का महत्व
आसन वेटलैंड न केवल प्रवासी पक्षियों के लिए एक आकर्षण है, बल्कि यह स्थानीय पर्यावरण और पर्यटन के लिए भी अहम है।
- पक्षी प्रेमियों का स्वर्ग: यह स्थान प्रकृति प्रेमियों और पक्षी-प्रेक्षकों के लिए अनूठा अनुभव प्रदान करता है।
- पर्यावरण संरक्षण: प्रवासी पक्षियों की उपस्थिति क्षेत्र की जैव विविधता को समृद्ध करती है।
निष्कर्ष
आसन बैराज भारत में प्रवासी पक्षियों के लिए प्रमुख स्थानों में से एक है। यहां साइबेरिया और अन्य देशों से आए जल पक्षी पर्यावरण और पर्यटन दोनों को बढ़ावा देते हैं। इस वेटलैंड की सुरक्षा के लिए किए गए प्रयास सराहनीय हैं।
क्या आपने इन विदेशी मेहमानों को देखने का अनुभव लिया है? यदि नहीं, तो आसन बैराज आपकी अगली यात्रा की सूची में जरूर होना चाहिए।
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