BBMB / हिमाचल के अधिकारों की लड़ाई में धूमल सरकार ने रखी थी नींव, मोदी सरकार ने दिलाया समाधान : डॉ. बिंदल
भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) की जलविद्युत परियोजनाओं से जुड़े बिजली बकाया विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद हिमाचल प्रदेश में राजनीतिक श्रेय को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने दावा किया कि इस ऐतिहासिक उपलब्धि की आधारशिला पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के कार्यकाल में रखी गई थी, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने विवाद के समाधान का व्यावहारिक रास्ता तैयार किया। उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू पर फैसले का राजनीतिक श्रेय लेने का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश की जनता को इस मामले का पूरा इतिहास बताया जाना चाहिए।
नाहन
बीबीएमबी के फैसले पर बिंदल ने उठाए राजनीतिक श्रेय के सवाल
नाहन स्थित अपने निवास पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने बीबीएमबी के लंबित बिजली बकाया मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह फैसला हिमाचल प्रदेश की जनता के अधिकारों की महत्वपूर्ण जीत है, लेकिन इसके पीछे दशकों तक चले कानूनी संघर्ष और विभिन्न सरकारों के प्रयासों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। बिंदल ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू इस उपलब्धि का पूरा श्रेय अपनी सरकार को देने के बजाय प्रदेशवासियों को बताएं कि हिमाचल के बिजली अधिकारों को कानूनी मान्यता कब और किस सरकार के कार्यकाल में मिली थी।
धूमल सरकार के कार्यकाल में 2011 में मिला था 7.19 प्रतिशत हिस्सेदारी का अधिकार
डॉ. बिंदल ने कहा कि बीबीएमबी परियोजनाओं में हिमाचल की हिस्सेदारी का विवाद वर्ष 1966 में पंजाब के पुनर्गठन से जुड़ा हुआ है। प्रदेश ने वर्ष 1969 में केंद्र सरकार के समक्ष अपनी हिस्सेदारी का दावा प्रस्तुत किया था, लेकिन लंबे समय तक समाधान नहीं निकलने पर वर्ष 1996 में सुप्रीम कोर्ट में मूल वाद दायर किया गया। उन्होंने बताया कि 27 सितंबर 2011 को सर्वोच्च न्यायालय ने हिमाचल प्रदेश की 7.19 प्रतिशत बिजली हिस्सेदारी के कानूनी अधिकार को मान्यता दी थी। उस समय प्रदेश में प्रेम कुमार धूमल के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार थी। बिंदल ने दावा किया कि यही फैसला वर्तमान समाधान की सबसे महत्वपूर्ण कानूनी आधारशिला बना।
कांग्रेस से सवाल, 2011 में अधिकार मिलने के बाद भी क्यों लंबित रहा बकाया
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कांग्रेस सरकारों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब वर्ष 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल की हिस्सेदारी निर्धारित कर दी थी, तो उसके बाद वर्षों तक प्रदेश को उसका पूरा बिजली बकाया क्यों नहीं मिल पाया। उन्होंने कहा कि वर्ष 1998 से 2003 और 2007 से 2012 के बीच भाजपा सरकारों ने इस विषय को प्राथमिकता दी थी। इसके बाद वर्ष 2017 से 2022 तक जयराम ठाकुर के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के कार्यकाल में भी प्रदेश के अधिकारों से जुड़ा यह मामला महत्वपूर्ण बना रहा। बिंदल ने आरोप लगाया कि वर्तमान कांग्रेस सरकार पूर्ववर्ती भाजपा सरकारों के प्रयासों को नजरअंदाज कर इस उपलब्धि का राजनीतिक श्रेय लेने का प्रयास कर रही है।
मोदी सरकार के कैशलेस सेटलमेंट फॉर्मूले से निकला समाधान : बिंदल
डॉ. बिंदल ने कहा कि वर्षों से लंबित बिजली बकाया विवाद के समाधान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उनके अनुसार केंद्र सरकार की ओर से भारत के महान्यायवादी ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष कैशलेस सेटलमेंट का प्रस्ताव प्रस्तुत किया। इसके तहत हिमाचल प्रदेश को नकद भुगतान करने के बजाय बकाया राशि का निपटारा बिजली के रूप में करने की व्यवस्था प्रस्तावित की गई। बिंदल ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने इस व्यवस्था को स्वीकार किया, जिससे लंबे समय से चले आ रहे विवाद के समाधान का रास्ता साफ हुआ। उन्होंने इस पहल के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर और केंद्र सरकार का आभार व्यक्त किया।
13,066 मिलियन यूनिट बकाये में से समायोजन के बाद मिलेंगी 11,973 मिलियन यूनिट बिजली
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने बिजली बकाये की गणना का विवरण देते हुए बताया कि केंद्र सरकार के आकलन के अनुसार हिमाचल प्रदेश का कुल बकाया 13,066 मिलियन यूनिट निर्धारित किया गया था। इसमें प्रदेश की 420.77 करोड़ रुपये की पूंजीगत देनदारी को 3.85 रुपये प्रति यूनिट की दर से समायोजित किया गया। इस समायोजन के परिणामस्वरूप लगभग 1,093 मिलियन यूनिट बिजली की कटौती हुई। इसके बाद हिमाचल प्रदेश को मिलने वाली कुल बिजली की मात्रा लगभग 11,973 मिलियन यूनिट निर्धारित हुई है। बिंदल के अनुसार यह व्यवस्था प्रदेश के पुराने बिजली बकाये के निपटारे की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
अक्टूबर से मार्च के बीच 20 वर्षों तक मिलेगी बकाया बिजली
डॉ. बिंदल ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट की मंजूर व्यवस्था के अनुसार पंजाब और हरियाणा अगले 20 वर्षों तक हिमाचल प्रदेश को बिजली उपलब्ध कराएंगे। उनके अनुसार प्रतिवर्ष लगभग 598 मिलियन यूनिट बिजली अक्टूबर से मार्च के बीच दी जाएगी। इस प्रकार प्रदेश को कुल लगभग 11,973 मिलियन यूनिट बिजली प्राप्त होगी। उन्होंने कहा कि यह फैसला हिमाचल के लंबे समय से लंबित अधिकारों के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है और इससे प्रदेश को आर्थिक लाभ मिलने की संभावना है।
प्रदेश के हितों पर राजनीति के बजाय सहयोग जरूरी : बिंदल
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के अधिकारों की रक्षा के लिए केंद्र और राज्य सरकार के बीच सकारात्मक सहयोग आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बीबीएमबी मामले में मिली सफलता को किसी एक सरकार की उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत करने के बजाय इसके पूरे ऐतिहासिक और कानूनी घटनाक्रम को सामने रखा जाना चाहिए। बिंदल ने दोहराया कि वर्ष 2011 में धूमल सरकार के कार्यकाल में मिले कानूनी अधिकार और वर्तमान केंद्र सरकार की ओर से प्रस्तुत समाधानकारी व्यवस्था की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता को इस फैसले से होने वाले लाभ के साथ उन प्रयासों की भी जानकारी मिलनी चाहिए, जिनके कारण वर्षों पुराना विवाद समाधान तक पहुंचा।