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भूर्शिंग महादेव मंदिर में शनिवार को सैकड़ों भक्तों ने किया श्रीमद् भागवत महापुराण ज्ञानयज्ञ कथा का रसपान

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन II • 3 Hours Ago • 1 Min Read

कथा वाचक आचार्य व्यास चंद्रशेखर चंडी वाले ने भक्तों को श्रीकृष्ण की विभिन्न लीलाओं का रसपान करवाया। श्रीमद् भागवत महापुराण ज्ञानयज्ञ के सातवें दिन सैकड़ों भक्तों ने कथा श्रवण कर धर्म लाभ प्राप्त किया। रविवार को हवन, कथा प्रवचन और भंडारे का आयोजन किया जाएगा।

नाहन

जिला सिरमौर के पच्छाद उपमंडल के भूर्शिंग महादेव मंदिर परिसर में श्रीमद् भागवत महापुराण ज्ञानयज्ञ के सातवें दिन कथा वाचक आचार्य व्यास चंद्रशेखर चंडी वाले पांच वृतांत भक्तों को रसपान करवाए। जिसमें गिरिराज गोवर्धन पर्वत को श्री कृष्ण द्वारा अपनी अनामिका उंगली पर उठाया जाना, मथुरा में पहुंचकर महाराज कंस का वध, जरा जरासंध को 17 बार पराजित करना, द्वारिका में श्री कृष्णा का पहुंचना, श्री कृष्ण का रुक्मणी से विवाह की कथा का रसपान सैकड़ो भक्तों को करवाया गया। रविवार को कथा के अंतिम दिन 5 और कथाएं सुनाई जाएगी। मोहाना निवासी एवं सर्वोच्च न्यायालय दिल्ली के वरिष्ठ अधिवक्ता जेएस अत्री और पुत्र अधिवक्ता विवेक अत्री अपने परिजनों के साथ इस महापुराण ज्ञान यज्ञ का आयोजन क्षेत्र की सुख समृद्धि और प्रदेश के जनकल्याण के लिए करवा रहे हैं। श्रीमद् भागवत कथा के दशम स्कंध में वर्णित गिरिराज गोवर्धन की कथा में श्रीकृष्ण की सबसे प्रमुख लीलाओं में से एक है, जो अहंकार के नाश और प्रकृति की पूजा का संदेश देती है।

भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को इंद्र के अहंकार को नष्ट करने और प्रत्यक्ष प्रकृति व गोवर्धन पर्वत की पूजा करने के लिए प्रेरित किया। इससे कुपित होकर इंद्र ने मूसलाधार बारिश की, तब श्रीकृष्ण ने गोवर्धन को अपनी कनिष्ठ उंगली पर उठाकर ब्रज की रक्षा की। मथुरा पहुँचते ही श्रीकृष्ण ने यज्ञशाला के बाहर रखे शिव के विशाल धनुष को पल भर में तोड़ दिया। उसके बाद श्रीकृष्ण ने मामा कंस के बाल पकड़कर उसे सिंहासन से नीचे गिरा दिया। इसके बाद अत्याचारी मामा कंस की छाती पर प्रहार कर उसका वध कर दिया। श्रीमद् भागवत कथा में मथुरा या द्वारका में श्री कृष्ण और रुक्मणी के विवाह की लीला अत्यंत रोमांचक वृतांत सुनाया। श्री कृष्ण और रुक्मणी का विवाह द्वारका में पूरे विधि-विधान और भव्यता के साथ दोनों का पाणिग्रहण संस्कार (विवाह) संपन्न हुआ। रविवार को प्रातः 10:00 बजे हवन यज्ञ पूर्णाहुति होगी। 11 से 1:00 बजे तक कथा प्रवचन होगा तथा 1:00 बजे से देर शाम तक भंडारे का प्रसाद वितरित किया जाएगा।