प्राकृतिक खेती ने बढ़ाई बिलासपुर के किसान परिवार की आय, एमएसपी से मिला बेहतर दाम
बिलासपुर के करोट गांव में प्रेम ठाकुर और उनके तीन भाई प्राकृतिक खेती से गेहूं, मक्का, धान, हल्दी और जिमीकंद का उत्पादन कर अपनी आर्थिकी मजबूत कर रहे हैं। परिवार को हल्दी और अन्य प्राकृतिक उपज के बेहतर दाम मिले हैं। प्रदेश सरकार की ओर से प्राकृतिक फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित करने और इसमें बढ़ोतरी से भी किसानों को लाभकारी मूल्य मिलने की उम्मीद बढ़ी है।
बिलासपुर/बिलासपुर
करोट निवासी 65 वर्षीय प्रेम ठाकुर अपने भाइयों श्याम लाल ठाकुर, मस्तराम ठाकुर और छोटा राम के साथ प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। परिवार पारंपरिक फसलों के साथ हल्दी और जिमीकंद जैसी नकदी फसलों का बड़े स्तर पर उत्पादन करता है। श्याम लाल ठाकुर को प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर ने वर्ष 2003 में कृषि दूत सम्मान से पुरस्कृत किया था, जबकि वर्ष 2009 में जिमीकंद की खेती के लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। परिवार वर्ष 1998 से जिमीकंद की खेती कर रहा है और इसकी उपज प्रदेश सहित बाहरी राज्यों में भी भेजी जाती है।
हल्दी से करीब दो लाख रुपये का कारोबार
प्रेम ठाकुर के अनुसार वह पिछले तीन से चार वर्षों से प्राकृतिक तरीके से हल्दी की खेती पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। इस वर्ष उन्होंने करीब 20 क्विंटल प्राकृतिक हल्दी तैयार की। इसमें से छह क्विंटल हल्दी जिला आत्मा परियोजना के माध्यम से 90 रुपये प्रति किलोग्राम की दर पर बेची गई, जबकि शेष उपज आसपास के लोगों ने इसी मूल्य पर खरीदी। उन्होंने हल्दी से करीब दो लाख रुपये का कारोबार किया। परिवार प्रतिवर्ष औसतन 20 से 25 क्विंटल हल्दी का उत्पादन कर रहा है।
परिवार ने इस वर्ष करीब डेढ़ क्विंटल काली हल्दी भी तैयार की, जिसका मूल्य 300 रुपये प्रति किलोग्राम तक मिला। प्रेम ठाकुर के मुताबिक औषधीय गुणों के कारण काली हल्दी की अच्छी मांग है। वह अब मेघालय की प्रसिद्ध लकाडोंग हल्दी की खेती की ओर भी बढ़ रहे हैं, जिसमें दूसरी किस्मों की तुलना में करक्यूमिन की मात्रा अधिक बताई जाती है। परिवार तीन बीघा भूमि में जिमीकंद उगाता है और प्रतिवर्ष औसतन 50 से 60 क्विंटल उत्पादन करता है, जिसे प्रदेश के बाहर 60 से 80 रुपये प्रति किलोग्राम तक दाम मिलता है।
प्रेम ठाकुर का परिवार धान, मक्का, सोयाबीन और दालों की प्राकृतिक खेती करने के साथ विभिन्न फसलों का बीज भी तैयार करता है। उन्होंने आत्मा परियोजना के माध्यम से प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण लिया है और महाराष्ट्र में सात दिवसीय एक्सपोजर विजिट में भी भाग लिया। प्रेम ठाकुर ने कहा कि प्राकृतिक हल्दी का न्यूनतम समर्थन मूल्य 90 रुपये से बढ़ाकर 150 रुपये प्रति किलोग्राम किए जाने से किसानों को बेहतर दाम मिलने के साथ उनकी आर्थिकी को भी मजबूती मिलेगी। उन्होंने इस निर्णय के लिए प्रदेश सरकार का आभार जताया।
प्राकृतिक फसलों के एमएसपी में बढ़ोतरी
प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्राकृतिक तरीके से उत्पादित गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 60 रुपये से बढ़ाकर 80 रुपये और मक्का का एमएसपी 40 रुपये से बढ़ाकर 50 रुपये प्रति किलोग्राम किया है। कच्ची हल्दी का मूल्य 90 रुपये से बढ़ाकर 150 रुपये प्रति किलोग्राम निर्धारित किया गया है। इसके अतिरिक्त प्रदेश में पहली बार अदरक के लिए 30 रुपये प्रति किलोग्राम न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया गया है। इसका उद्देश्य किसानों को लाभकारी मूल्य देना और लोगों के लिए रसायन रहित एवं पोषणयुक्त खाद्यान्न की उपलब्धता बढ़ाना है।
आत्मा परियोजना के तहत गेहूं की खरीद
उपनिदेशक कृषि कुलभूषण धीमान ने बताया कि जिले में आत्मा परियोजना के माध्यम से इस वर्ष प्राकृतिक खेती करने वाले 136 किसानों से करीब 183 क्विंटल गेहूं 80 रुपये प्रति किलोग्राम की दर पर खरीदा गया है। उनके अनुसार मक्का 60 रुपये और हल्दी 150 रुपये प्रति किलोग्राम की दर पर खरीदी जाएगी। उपायुक्त बिलासपुर राहुल कुमार ने कहा कि जिला प्रशासन का प्रयास है कि प्राकृतिक तरीके से उत्पादित फसलों के लिए किसानों को सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य मिले, जिससे उनकी आय मजबूत हो और लोगों को रसायन रहित एवं पोषणयुक्त खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा सके।