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Politics / बीडीसी अध्यक्ष से बिंदल ने किया बड़ा डैमेज कंट्रोल

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन II • 1 Hour Ago • 1 Min Read

Politics : नाहन पंचायत समिति अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनाव के परिणामों को स्थानीय राजनीति से आगे बढ़कर बड़े राजनीतिक संकेतों के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गुर्जर समुदाय से जुड़े चेहरे को अध्यक्ष बनाकर भाजपा ने सामाजिक समीकरणों को साधने की कोशिश की है। इस फैसले को 2027 विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक संतुलन बनाने की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है।

नाहन

नाहन की राजनीति में पंचायत समिति नाहन के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव महज स्थानीय निकाय का चुनाव नहीं माना जा रहा। राजनीतिक गलियारों में इसकी चर्चा 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल के बड़े सियासी डैमेज कंट्रोल के रूप में हो रही है।राजनीतिक जानकारों की मानें तो पंचायत समिति नाहन के अध्यक्ष पद पर ग्राम फलियां वार्ड से रमेश कुमार को चुना जाना केवल संगठनात्मक फैसला नहीं बल्कि एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है। गुर्जर समाज में मजबूत पकड़ रखने वाले रमेश कुमार की ताजपोशी को उस समुदाय तक सीधे राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है, जो पिछले कुछ वर्षों से हाटी जनजातीय दर्जे के मुद्दे को लेकर नाराजगी जताता रहा है।

दरअसल, गिरीपार क्षेत्र के हाटी समुदाय को जनजातीय दर्जा मिलने के बाद नाहन विधानसभा क्षेत्र के गुर्जर समुदाय के एक वर्ग ने आरक्षण और प्रतिनिधित्व से जुड़े सवाल उठाए थे। इस मुद्दे को लेकर धरना-प्रदर्शन से लेकर न्यायालय का दरवाजा खटखटाने तक की स्थिति बनी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस पूरे घटनाक्रम का असर 2022 विधानसभा चुनाव में भी देखने को मिला, जब डॉ. राजीव बिंदल को अप्रत्याशित हार का सामना करना पड़ा।राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि इस फैसले से भाजपा को गिरीपार क्षेत्र में लाभ मिला, लेकिन मैदानी क्षेत्र में इसके अलग राजनीतिक प्रभाव भी सामने आए। खासकर गुर्जर समुदाय के भीतर असंतोष की भावना खुलकर दिखाई दी। ऐसे में सबसे अधिक राजनीतिक चुनौती डॉ. राजीव बिंदल के सामने खड़ी हुई, क्योंकि नाहन विधानसभा क्षेत्र में गुर्जर समुदाय लंबे समय से उनके समर्थक आधार का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता रहा है।

यही वजह है कि पंचायत समिति नाहन के अध्यक्ष पद पर गुर्जर समाज से जुड़े चेहरे को आगे लाने को राजनीतिक पर्यवेक्षक एक बड़े डैमेज कंट्रोल के रूप में देख रहे हैं। माना जा रहा है कि इसके माध्यम से उस वोट बैंक को फिर से विश्वास में लेने का प्रयास किया गया है, जो पिछले कुछ वर्षों में दूरी बनाता दिखाई दे रहा था।दिलचस्प तथ्य यह भी है कि डॉ. बिंदल ने अपना यह दांव उसी भूड़ क्षेत्र में खेला है जिसे उनकी राजनीतिक ताकत का अहम केंद्र माना जाता है। 2017 विधानसभा चुनाव में काला आम से लेकर भूड़ क्षेत्र तक का इलाका उनकी जीत में निर्णायक साबित हुआ था। राजनीतिक जानकारों के अनुसार इस क्षेत्र और गुर्जर समुदाय का समर्थन उस चुनाव में जीत का महत्वपूर्ण आधार बना था।उधर उपाध्यक्ष पद पर माया देवी के चयन को भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। अध्यक्ष और उपाध्यक्ष दोनों पदों के माध्यम से भूड़ क्षेत्र को विशेष राजनीतिक महत्व दिए जाने के संकेत साफ दिखाई दे रहे हैं। इससे यह संदेश भी गया है कि आने वाले समय में इस क्षेत्र की राजनीतिक भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पंचायत समिति नाहन का यह चुनाव स्थानीय निकाय की सीमाओं से निकलकर विधानसभा चुनाव की बड़ी बिसात का हिस्सा बन चुका है। 2027 चुनाव में अभी समय है, लेकिन उसके संकेत और समीकरण बनने शुरू हो चुके हैं। ऐसे में रमेश कुमार को अध्यक्ष बनाना केवल एक पद भरना नहीं बल्कि एक महत्वपूर्ण सामाजिक वर्ग तक पहुंचने की राजनीतिक पहल के रूप में देखा जा रहा है।कुल मिलाकर नाहन की राजनीति में यह संदेश स्पष्ट माना जा रहा है कि डॉ. राजीव बिंदल ने एक बार फिर सामाजिक समीकरणों के सहारे राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश की है। अब देखना दिलचस्प होगा कि यह दांव केवल प्रतीकात्मक साबित होता है या फिर वास्तव में गुर्जर समुदाय और बिंदल के बीच बनी राजनीतिक दूरी को कम करने में सफल रहता है। फिलहाल पंचायत समिति नाहन का यह चुनाव स्थानीय राजनीति से कहीं अधिक बड़े राजनीतिक संकेत देकर गया है।

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