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लाहौल में ब्लूबेरी खेती की नई पहल, गौंधला के पॉलीहाउस में 500 पौधे तैयार

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन • 54 Mins Ago • 1 Min Read

लाहौल घाटी में ब्लूबेरी को नई नकदी फसल के रूप में विकसित करने की पहल के तहत गौंधला के बागवान प्रताप चंद ने 500 वर्ग मीटर के पॉलीहाउस में 500 पौधे सफलतापूर्वक उगाए हैं। बागवानी विभाग के प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और आर्थिक सहयोग से तैयार इस अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन स्थल का उपायुक्त किरण भड़ाना ने शुभारंभ किया। इन पौधों में जल्द फल आने की संभावना जताई गई है।

केलांग

जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति में ब्लूबेरी उत्पादन का यह प्रयास उपायुक्त किरण भड़ाना के सुझाव पर बागवानी विभाग के सहयोग से किया गया है। प्रशासन के अनुसार, इसका उद्देश्य घाटी के किसानों और बागवानों को आलू तथा सेब के अलावा आमदनी का एक अन्य विकल्प उपलब्ध कराना है। उपायुक्त ने कहा कि कम भूमि पर अधिक उत्पादन की संभावना को देखते हुए ब्लूबेरी की खेती किसानों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है। उन्होंने क्षेत्र के अन्य बागवानों से गौंधला में तैयार स्थल का अवलोकन करने और इस पहल से जानकारी लेने का आग्रह किया।

परियोजना पर 12.50 लाख रुपये खर्च

ब्लूबेरी का अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन स्थल केंद्र सरकार की एकीकृत बागवानी मिशन योजना के तहत तैयार किया गया है। प्रशासन की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, इस परियोजना पर लगभग 12 लाख 50 हजार रुपये खर्च हुए हैं। बागवानी विभाग ने संबंधित बागवान को नौ लाख 37 हजार 500 रुपये का अनुदान प्रदान किया है। विभाग ने भरोसा दिया है कि ब्लूबेरी उत्पादन अपनाने के इच्छुक किसानों और बागवानों को आवश्यक मार्गदर्शन तथा यथासंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

उपायुक्त किरण भड़ाना ने बताया कि ब्लूबेरी छोटे आकार का नीले या बैंगनी रंग का मुलायम फल है। भारत में इसे अभी प्रीमियम या विदेशी फल की श्रेणी में माना जाता है और सामान्य फलों की तुलना में इसका बाजार मूल्य अधिक रहता है। उन्होंने कहा कि गौंधला में इसके उत्पादन की दिशा में किया गया पहला प्रयास सफल रहा है। घाटी में इस फसल को बढ़ावा देने के लिए किसानों से संपर्क किया जाएगा, ताकि इच्छुक बागवान जरूरी जानकारी और सहायता के साथ ब्लूबेरी की खेती की ओर कदम बढ़ा सकें।

खेती के लिए विशेष परिस्थितियां जरूरी

उप निदेशक बागवानी मीनाक्षी शर्मा ने बताया कि ब्लूबेरी की खेती सामान्य फलदार पौधों से कुछ अलग होती है। इसके लिए अम्लीय मिट्टी या ग्रो-बैग, नियंत्रित सिंचाई और उपयुक्त किस्म की आवश्यकता रहती है। उनके अनुसार, हिमाचल प्रदेश के पालमपुर, कांगड़ा, मंडी और कुल्लू जैसे अपेक्षाकृत गर्म क्षेत्रों में भी ब्लूबेरी उगाई जा रही है। देश में फिलहाल इसका उत्पादन कम है, लेकिन कई राज्यों में प्रयोग और व्यावसायिक खेती बढ़ रही है। कश्मीर में भी इसकी व्यावसायिक संभावनाओं पर काम किया जा रहा है।

बागवानी विभाग के अनुसार, ब्लूबेरी में एंटीऑक्सीडेंट, फाइबर और विटामिन पाए जाते हैं तथा शहरी उपभोक्ताओं के बीच इसकी मांग बढ़ रही है। विभाग का मानना है कि उपयुक्त तकनीक के साथ इसकी खेती करने पर घाटी के किसानों के लिए आमदनी की बेहतर संभावनाएं बन सकती हैं। इस अवसर पर बागवान प्रताप चंद ने उपायुक्त को पॉलीहाउस में लगाए गए पौधों की जानकारी दी। उपस्थित किसानों और बागवानों ने कृषि एवं बागवानी क्षेत्र से जुड़ी समस्याएं भी रखीं, जिनके यथासंभव समाधान का आश्वासन दिया गया।