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Himachal Government / विधानसभा से राज्य विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक पारित, वित्तीय निगरानी होगी मजबूत

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन • 1 Hour Ago • 1 Min Read

हिमाचल विधानसभा में राज्य विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक पारित, वित्तीय फैसलों पर बढ़ेगी सरकार की निगरानी CM सुक्खू का जयराम पर हमला— अच्छे मुख्यमंत्री हो सकते हैं, लेकिन खराब वित्त मंत्री रहे शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा में बुधवार को ‘हिमाचल प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2026’ पारित कर दिया गया।


इस विधेयक के जरिए प्रदेश के छह राज्य विश्वविद्यालयों से संबंधित कानूनों में संशोधन किए गए हैं। नए प्रावधानों के तहत विश्वविद्यालयों के वित्तीय मामलों, नियुक्तियों, पद सृजन, पदोन्नति और वेतन-भत्तों पर वित्त समिति की भूमिका अहम होगी। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि सरकार विश्वविद्यालयों में पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करने के पक्ष में है। उन्होंने कहा कि भर्ती, पद सृजन, पदोन्नति और वेतन-भत्तों से जुड़े मामलों पर पहले वित्त समिति विचार करेगी।

समिति में वित्त विभाग की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी। विधेयक के अनुसार शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों की भर्ती के लिए चयन समितियों का गठन किया जाएगा और निर्धारित प्रक्रिया के तहत नियुक्तियां होंगी। कुलपति विश्वविद्यालय का प्रमुख कार्यकारी एवं शैक्षणिक अधिकारी होगा। आपात स्थिति में कुलपति तत्काल निर्णय ले सकेगा, लेकिन बाद में सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी लेना आवश्यक होगा। कार्यकारी परिषद विश्वविद्यालय के सामान्य प्रशासन और संपत्ति से जुड़े मामलों की जिम्मेदारी संभालेगी, जबकि वित्त समिति बजट, खातों और ऑडिट रिपोर्ट की जांच कर बोर्ड को सलाह देगी। वित्त समिति और कार्यकारी परिषद के बीच मतभेद होने पर मामला कुलाधिपति के पास जाएगा और राज्य सरकार से परामर्श के बाद उनका निर्णय अंतिम होगा।

पुराने कर्ज पर भी सरकार को देना पड़ रहा ब्याज और मूलधन वहीं प्रदेश के बढ़ते कर्ज को लेकर मुख्यमंत्री सुक्खू ने पूर्व भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कर्ज हर सरकार लेती है, लेकिन मौजूदा सरकार को पूर्व सरकार द्वारा लिए गए कर्ज को भी चुकाना पड़ रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जयराम ठाकुर अच्छे मुख्यमंत्री हो सकते हैं, लेकिन वे खराब वित्त मंत्री रहे। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश की कर्ज लेने की सीमा करीब 9 हजार करोड़ रुपये है, जबकि सरकार को हर वर्ष करीब 11 हजार करोड़ रुपये पुराने कर्ज की अदायगी में चुकाने पड़ रहे हैं। ऐसे में राज्य की ट्रेजरी से अतिरिक्त राशि खर्च करनी पड़ रही है।

सुक्खू ने आरोप लगाया कि पूर्व भाजपा सरकार के दौरान प्रदेश की संपदा को नुकसान पहुंचाया गया और शिक्षा व स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी अपेक्षित काम नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार लगातार प्रदेश की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। लॉटरी और भांग की खेती के मुद्दे पर भाजपा के विरोध को भी मुख्यमंत्री ने बेवजह बताया। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति पर लॉटरी खरीदने का दबाव नहीं है और भांग की खेती के मामले में भाजपा विधायक भी गठित सेलेक्ट कमेटी का हिस्सा हैं। मुख्यमंत्री ने बीबीएमबी में हिमाचल प्रदेश के अधिकारों का मुद्दा भी दोहराते हुए कहा कि राज्य सरकार अपने अधिकारों की लड़ाई पहले भी लड़ती रही है और आगे भी मजबूती से लड़ती रहेगी।