CBSE / नौवीं के सिलेबस में बड़ा बदलाव, AI की पढ़ाई होगी अनिवार्य; गणित-विज्ञान समेत पांच विषयों का बदलेगा स्वरूप
सीबीएसई स्कूलों में नौवीं कक्षा की पढ़ाई का स्वरूप बदलने की तैयारी है। शैक्षणिक सत्र 2027-28 से विद्यार्थियों के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की पढ़ाई अनिवार्य विषय के रूप में शामिल करने की योजना है। इसके साथ हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान के सिलेबस में भी बदलाव किया जाएगा। नए पाठ्यक्रम में केवल विषयों की जानकारी देने के बजाय विद्यार्थियों में कौशल, रचनात्मकता और व्यावहारिक समझ विकसित करने पर जोर रहेगा।
शिमला
नौवीं में AI की पढ़ाई होगी अनिवार्य
सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों में शैक्षणिक सत्र 2027-28 से नौवीं कक्षा के विद्यार्थियों को AI की पढ़ाई करवाने की तैयारी है। नई व्यवस्था में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को अनिवार्य विषयों में शामिल किया जाएगा। सीबीएसई से संबद्ध सरकारी और निजी दोनों तरह के स्कूलों में नई व्यवस्था लागू होगी। इसके लिए स्कूलों को संशोधित पाठ्यक्रम के अनुसार शिक्षण व्यवस्था तैयार करनी होगी।
हिंदी-अंग्रेजी से गणित-विज्ञान तक बदलेगा सिलेबस
नौवीं कक्षा में हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान पांच प्रमुख अनिवार्य विषय रहेंगे, लेकिन इनके पाठ्यक्रम में बदलाव किया जाएगा। नए सिलेबस में विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान देने के बजाय विषयों को व्यावहारिक रूप से समझने पर जोर रहेगा। कौशल शिक्षा को भी विद्यार्थियों के लिए अनिवार्य करने की तैयारी है। इसके तहत गणित और विज्ञान को अधिक रुचिकर बनाने तथा सामाजिक विज्ञान को जिंदगी से जोड़कर पढ़ाने की दिशा में बदलाव किए जाएंगे।
रटने के बजाय समझ और प्रयोग पर रहेगा फोकस
नए पाठ्यक्रम में विज्ञान की पढ़ाई में प्रयोगों और व्यावहारिक गतिविधियों को अधिक महत्व दिया जाएगा। गणित में अवधारणाओं को समझाने और उनके इस्तेमाल पर जोर रहेगा, जबकि सामाजिक विज्ञान को रोजमर्रा के जीवन से जोड़ने की कोशिश की जाएगी। कला शिक्षा, शारीरिक शिक्षा और स्वास्थ्य संबंधी गतिविधियों को भी पाठ्यक्रम से जोड़ने की तैयारी है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को बढ़ावा देना है।
स्कूलों को नए सिलेबस की तैयारी के निर्देश
सीबीएसई की ओर से स्कूल प्रधानाचार्यों को विद्यार्थियों और अभिभावकों को नए पाठ्यक्रम के बारे में जानकारी देने तथा उसके अनुरूप शिक्षण व्यवस्था तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार स्कूलों को सिलेबस और शिक्षण प्रक्रिया में आवश्यक बदलाव करने होंगे। नई व्यवस्था के लागू होने से पहले स्कूलों को शिक्षकों और विद्यार्थियों को इसके अनुरूप तैयार करना होगा।
कम अंक वाले विद्यार्थियों की अलग से होगी पहचान
नए शैक्षणिक ढांचे में विद्यार्थियों के प्रदर्शन की निगरानी पर भी जोर रहेगा। 50 प्रतिशत से कम अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को अंडरपरफॉर्मिंग श्रेणी में रखा जाएगा और उनके शैक्षणिक स्तर को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इस व्यवस्था के जरिए सीबीएसई का फोकस केवल परीक्षा परिणाम तक सीमित रखने के बजाय विद्यार्थियों की समझ, कौशल और सीखने की क्षमता को बेहतर बनाने पर रहेगा।