पेट में रह गई सर्जिकल सामग्री, दो डॉक्टरों को चुकाना होगा 5.12 लाख रुपये मुआवजा
चंबा जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने ऑपरेशन के दौरान मरीज के पेट में सर्जिकल सामग्री रह जाने के मामले में दो डॉक्टरों को 5,12,026 रुपये मुआवजा चुकाने का आदेश दिया है। आयोग ने शिकायत दर्ज होने की तारीख से पूरी राशि के भुगतान तक नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज और 15 हजार रुपये मुकदमा खर्च देने के निर्देश भी दिए हैं। यह फैसला 24 सितंबर 2026 को सुनाया गया।
चंबा/डलहौजी
डलहौजी तहसील के दुहका निवासी राकेश कुमार को पेट में दर्द की शिकायत के बाद 29 जुलाई 2019 को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जांच में उनके पित्ताशय में पथरी पाई गई, जिसके बाद ऑपरेशन किया गया। उन्हें 3 अगस्त को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। कुछ समय तक उनकी स्थिति सामान्य रही, लेकिन करीब एक साल बाद सितंबर 2020 में पेट में फिर तेज दर्द होने लगा। परेशानी बढ़ने पर उन्होंने आगे चिकित्सकीय जांच करवाई।
जांच के बाद दोबारा करनी पड़ी सर्जरी
राकेश कुमार ने 13 सितंबर 2020 को चंडीगढ़ में सीईसीटी स्कैन करवाया। जांच में पित्ताशय के नीचे करीब 8 गुणा 8 सेंटीमीटर का संग्रह दिखाई दिया, जिसमें हवा के छोटे बिंदुओं के साथ टांके से जुड़ी सामग्री भी नजर आई। इसके बाद पठानकोट में कराए गए अल्ट्रासाउंड के आधार पर ऑपरेशन में इस्तेमाल सर्जिकल सामग्री शरीर के अंदर रह जाने की आशंका जताई गई। पंचकूला के धवन अस्पताल में एक अक्तूबर 2020 को दोबारा सर्जरी कर पेट के अंदर मौजूद विदेशी सामग्री निकाली गई।
आयोग ने माना सेवा में कमी का मामला
दूसरी सर्जरी के बाद राकेश कुमार ने पहली सर्जरी से संबंधित उपचार को लेकर उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज करवाई। मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने चिकित्सकीय रिकॉर्ड और उपलब्ध साक्ष्यों की समीक्षा की। आयोग ने माना कि पहली सर्जरी में इस्तेमाल सामग्री का पेट के अंदर रह जाना स्वीकार्य चिकित्सा मानकों के अनुरूप नहीं था। इसी आधार पर इसे सेवा में कमी और चिकित्सकीय लापरवाही का गंभीर मामला माना गया। शिकायतकर्ता ने आयोग के समक्ष कुल 6,52,026 रुपये का दावा किया था।
दस्तावेजों और मामले के तथ्यों की समीक्षा के बाद आयोग ने 5,12,026 रुपये मुआवजा निर्धारित किया। दोनों डॉक्टरों को यह राशि संयुक्त और पृथक रूप से चुकाने के निर्देश दिए गए हैं। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग चंबा के अध्यक्ष हिमांशु मिश्रा और सदस्य नारायण ठाकुर ने 24 सितंबर 2026 को आदेश सुनाया। आदेश के अनुसार मुआवजे के अतिरिक्त शिकायत की तारीख से भुगतान तक नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज और 15 हजार रुपये मुकदमा खर्च भी देना होगा।
क्या होता है गॉसिपिबोमा
गॉसिपिबोमा उस स्थिति को कहा जाता है, जब किसी सर्जरी में इस्तेमाल की गई गॉज या अन्य सामग्री गलती से मरीज के शरीर के अंदर रह जाती है। शरीर ऐसी सामग्री के आसपास प्रतिक्रिया कर सकता है, जिससे गांठ, सूजन, संक्रमण या दूसरी परेशानी पैदा हो सकती है। ऐसे मामलों में मरीज को लंबे समय बाद भी पेट दर्द या अन्य लक्षण हो सकते हैं। लगातार या असामान्य दर्द होने पर चिकित्सकीय जांच आवश्यक होती है।