Loading...

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने राज्यपाल से चंडीगढ़ हिस्सेदारी, बीबीएमबी बकाया और शानन परियोजना पर चर्चा की

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन II • 1 Hour Ago • 1 Min Read

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया से मुलाकात कर हिमाचल प्रदेश से जुड़े विभिन्न लंबित मामलों पर चर्चा की। बैठक में चंडीगढ़ में हिस्सेदारी, बीबीएमबी से संबंधित देनदारियों और शानन जलविद्युत परियोजना सहित कई विषयों पर राज्य सरकार का पक्ष रखा गया।

चंडीगढ़

लंबित मामलों पर हुई चर्चा

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया से शिष्टाचार भेंट की और हिमाचल प्रदेश से जुड़े लंबित मामलों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने राज्यपाल से आग्रह किया कि चंडीगढ़ में हिमाचल के अधिकार, बीबीएमबी से संबंधित देनदारियां और शानन जलविद्युत परियोजना जैसे विषयों पर शीघ्र, न्यायसंगत और संवैधानिक समाधान के लिए सहयोग दिया जाए।

चंडीगढ़ में 7.19 प्रतिशत हिस्सेदारी का मुद्दा

मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 के प्रावधानों के अनुसार हिमाचल प्रदेश अविभाजित पंजाब का उत्तराधिकारी राज्य है और उसे हस्तांतरित क्षेत्रों की जनसंख्या के अनुपात में चंडीगढ़ में 7.19 प्रतिशत हिस्सेदारी का अधिकार है। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ का विकास अविभाजित पंजाब के संयुक्त संसाधनों से हुआ था, इसलिए हिमाचल के वैधानिक दावे पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

अतिरिक्त हिमाचल सदन के निर्माण की मांग

मुख्यमंत्री ने चंडीगढ़ में एक अतिरिक्त हिमाचल सदन के निर्माण की आवश्यकता भी रखी। उन्होंने कहा कि मौजूदा हिमाचल भवन राज्य के लोगों की बढ़ती जरूरतों के लिए पर्याप्त नहीं है, जबकि शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रशासनिक कार्यों के लिए चंडीगढ़ आने वाले लोगों की संख्या लगातार बनी रहती है। उन्होंने बताया कि सेक्टर-52 में हिमाचल सदन के निर्माण के लिए 4.736 एकड़ भूमि चिन्हित की जा चुकी है।

बीबीएमबी से संबंधित देनदारियों का मुद्दा

मुख्यमंत्री ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) से जुड़े लंबित वित्तीय मामलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राज्य पिछले एक दशक से अधिक समय से 13,066 मिलियन यूनिट बिजली और उससे संबंधित वित्तीय देय की प्रतीक्षा कर रहा है। मुख्यमंत्री ने इस देयता के शीघ्र निपटारे की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि राज्य के अधिकारों से जुड़े इस विषय को लंबित नहीं रखा जाना चाहिए।

शानन जलविद्युत परियोजना पर राज्य का पक्ष

मुख्यमंत्री ने शानन जलविद्युत परियोजना पर हिमाचल प्रदेश का पक्ष भी रखा। उन्होंने कहा कि मंडी रियासत कभी संयुक्त पंजाब का हिस्सा नहीं रही और यह परियोजना मंडी जिले में स्थित है, जो पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 की धारा 2(एन) में परिभाषित हस्तांतरित क्षेत्रों में शामिल नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि परियोजना से संबंधित 99 वर्ष की लीज 2 मार्च 2024 को समाप्त हो चुकी है, इसलिए लीज आधारित अधिकार अब प्रभावी नहीं हैं।

संवाद के माध्यम से समाधान की अपेक्षा

मुख्यमंत्री ने कहा कि चंडीगढ़ में हिस्सेदारी, बीबीएमबी से जुड़े देय और शानन परियोजना जैसे सभी लंबित विषयों का समाधान पारस्परिक संवाद, सहयोग और संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप किया जा सकता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि संबंधित पक्षों के बीच रचनात्मक बातचीत से इन मामलों पर आगे प्रगति संभव है।