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Crime / 8 किलो चरस तस्करी मामले में दोषी को 14 वर्ष का कठोर कारावास, अदालत ने लगाया 1.50 लाख रुपये जुर्माना

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन II • 25 Jul 2026 • 1 Min Read

Crime : शिमला जिले में 8 किलोग्राम चरस बरामदगी से जुड़े एनडीपीएस मामले में विशेष अदालत ने आरोपी को 14 वर्ष के कठोर कारावास और 1.50 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। अदालत ने आदेश दिया है कि जुर्माना जमा नहीं करने की स्थिति में दोषी को तीन वर्ष का अतिरिक्त साधारण कारावास भी भुगतना होगा।

शिमला

विशेष अदालत ने सुनाया फैसला

शिमला जिले में 8 किलोग्राम चरस बरामदगी के मामले में विशेष न्यायाधीश-1, शिमला की अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए 14 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर 1.50 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। न्यायालय के आदेश के अनुसार यदि आरोपी निर्धारित जुर्माना जमा नहीं करता है तो उसे तीन वर्ष का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।

2024 में दर्ज हुआ था एनडीपीएस अधिनियम के तहत मामला

पुलिस के अनुसार दोषी की पहचान 42 वर्षीय मोहन लाल पुत्र बंसी लाल निवासी कुपवी, जिला शिमला के रूप में हुई है। वर्ष 2024 में पुलिस थाना कुपवी में उसके विरुद्ध एनडीपीएस अधिनियम की धारा 20 और 25 के तहत मामला दर्ज किया गया था। पुलिस टीम ने कार्रवाई के दौरान उसके कब्जे से 8 किलोग्राम चरस बरामद की थी। जांच पूरी होने के बाद आरोप पत्र नियमानुसार विशेष अदालत में प्रस्तुत किया गया।

साक्ष्यों के आधार पर दोष सिद्ध

मामले की सुनवाई के उपरांत विशेष न्यायाधीश-1, शिमला ने 23 जुलाई को आरोपी को दोषी करार दिया। अदालत ने पुलिस द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजी एवं वैज्ञानिक साक्ष्यों तथा अभियोजन पक्ष की दलीलों के आधार पर आरोपी को 14 वर्ष के कठोर कारावास और 1.50 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि जुर्माना जमा नहीं करने पर दोषी को तीन वर्ष का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।

वैज्ञानिक जांच और प्रभावी पैरवी का उल्लेख

शिमला पुलिस ने बताया कि मामले की जांच कानूनी प्रावधानों और वैज्ञानिक प्रक्रिया के अनुरूप की गई। जांच के दौरान आवश्यक साक्ष्यों का व्यवस्थित संकलन किया गया तथा फॉरेंसिक साक्ष्यों का भी उपयोग किया गया। पुलिस के अनुसार प्रभावी जांच और अभियोजन पक्ष की पैरवी के आधार पर अदालत में आरोप सिद्ध हुए। जिला शिमला पुलिस ने कहा कि मादक पदार्थों की तस्करी के मामलों में कानून के अनुसार कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी तथा ऐसे मामलों में प्रभावी जांच और सशक्त अभियोजन सुनिश्चित किया जाएगा।

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