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Crime: शादी के वादे से जुड़े दुष्कर्म मामले में युवक बरी, अदालत ने नीयत साबित करना जरूरी बताया

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन • 45 Mins Ago • 1 Min Read

Crime: शिमला की फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट ने शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने के आरोप में आनी, कुल्लू निवासी युवक को बरी कर दिया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विवेक शर्मा की अदालत ने कहा कि शादी का प्रत्येक अधूरा वादा अपने आप में अपराध नहीं माना जा सकता। दोष सिद्ध करने के लिए यह साबित होना आवश्यक है कि आरोपी की नीयत शुरुआत से ही शादी के नाम पर धोखा देने की थी।

शिमला

मामले के अनुसार युवक और युवती की दोस्ती सोशल मीडिया के माध्यम से हुई थी। दोस्ती आगे बढ़ने के बाद दोनों करीब 10 महीने तक एक कमरे में मिलते रहे और इस दौरान उनके बीच शादी को लेकर भी बातचीत हुई। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि शुरुआत में शादी करने का इरादा था, लेकिन बाद में परिस्थितियों के कारण रिश्ता नहीं हो सका, तो केवल वादा पूरा नहीं होने के आधार पर उसे स्वतः आपराधिक कृत्य नहीं माना जा सकता।

मामले में 14 दिसंबर 2024 को विवाद की स्थिति बनी थी। युवक अपने माता-पिता के साथ युवती के गांव में शादी की बातचीत करने जा रहा था, लेकिन उस समय युवती वहां मौजूद नहीं थी। इसके बाद दोनों परिवारों के बीच विवाद हुआ और शादी का रिश्ता टूट गया। युवती ने बाद में बालूगंज थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिस पर आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 69 के तहत मामला दर्ज किया गया था।

अदालत ने परिस्थितियों और नीयत को माना महत्वपूर्ण

सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले से जुड़े तथ्यों, दोनों के संबंध और शादी टूटने की परिस्थितियों पर विचार किया। अदालत ने कहा कि शादी का वादा पूरा नहीं होना और शुरुआत से ही शादी के नाम पर धोखा देने की मंशा रखना अलग-अलग स्थितियां हैं। किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने के लिए वादा करते समय उसकी गलत नीयत स्थापित होना जरूरी है। उपलब्ध तथ्यों के आधार पर अदालत ने युवक को आरोपों से बरी कर दिया।

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