डीएवी पब्लिक स्कूल राजगढ़ में दशहरा उत्सव, विद्यार्थियों ने जाना सत्य और मर्यादा का महत्व
डीएवी पब्लिक स्कूल राजगढ़ में दशहरा पर्व उत्साह के साथ मनाया गया। वरिष्ठ और कनिष्ठ विंग के विद्यार्थियों ने कार्यक्रम में भाग लिया तथा भारतीय संस्कृति, परंपराओं और बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश समझा। प्रधानाचार्य चंद्रेश्वर शर्मा ने विद्यार्थियों से भगवान श्रीराम के आदर्शों से प्रेरणा लेकर सत्य, मर्यादा, अनुशासन और सदाचार को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
राजगढ़
प्रधानाचार्य चंद्रेश्वर शर्मा ने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन सत्य, धर्म, त्याग, विनम्रता और कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक है। उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि रावण का अहंकार और उसके गलत निर्णय यह सीख देते हैं कि ज्ञान और शक्ति होने के बावजूद मर्यादा का पालन नहीं करने पर पतन निश्चित है। उन्होंने कहा कि दशहरा केवल रावण के पुतले के दहन का पर्व नहीं, बल्कि अपने भीतर मौजूद अहंकार, क्रोध, लालच और ईर्ष्या जैसी बुराइयों को समाप्त करने का संकल्प लेने का अवसर भी है।
राम और हनुमान की वेशभूषा में पहुंचे बच्चे
समारोह में एलकेजी और यूकेजी के नन्हे विद्यार्थी भगवान श्रीराम और हनुमान की आकर्षक वेशभूषा में दिखाई दिए। हाथों में धनुष-बाण लिए बच्चों ने उपस्थित लोगों का ध्यान आकर्षित किया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रावण के पुतले पर प्रतीकात्मक रूप से तीर चलाने की गतिविधि रही। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को सत्य की विजय और बुराई के अंत का संदेश दिया गया। विद्यालय में रावण का पुतला तैयार करने के लिए भगवान दास के प्रयासों और रचनात्मकता की विशेष सराहना की गई।
प्रधानाचार्य ने विद्यार्थियों से माता-पिता और गुरुजनों का सम्मान करने तथा ईमानदारी, अनुशासन और अच्छे संस्कारों के साथ आगे बढ़ने को कहा। उन्होंने विद्यार्थियों, अभिभावकों, शिक्षकों और क्षेत्रवासियों को दशहरे की शुभकामनाएं देते हुए सभी के सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम के आदर्शों को जीवन में अपनाकर संस्कारवान समाज के निर्माण में योगदान दिया जा सकता है।