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धर्मशाला सीयू परिसर मामले में हाई कोर्ट ने मांगी विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट, 22 जुलाई तक देना होगा जवाब

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन2 • 46 Mins Ago • 1 Min Read

हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के धर्मशाला परिसर परियोजना से जुड़े मामले में उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। अदालत ने परियोजना की वर्तमान स्थिति, वित्तीय प्रावधान और प्रगति से संबंधित जानकारी 22 जुलाई तक दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

धर्मशाला

केंद्रीय विश्वविद्यालय परिसर मामले की सुनवाई

हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के धर्मशाला परिसर से जुड़े मामले में हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से परियोजना की वर्तमान स्थिति पर शपथ पत्र सहित विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। यह मामला मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध था। अदालत ने परियोजना से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराने की आवश्यकता जताई है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि परिसर निर्माण और उससे जुड़ी प्रशासनिक एवं वित्तीय प्रक्रियाओं में अब तक कितनी प्रगति हुई है और शेष कार्यों को पूरा करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।

याचिकाकर्ता पक्ष ने उठाए विभिन्न मुद्दे

सुनवाई के दौरान जनहित याचिका के याचिकाकर्ता अतुल भारद्वाज की ओर से अधिवक्ता नित्य शर्मा ने अदालत के समक्ष पक्ष रखा। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि राज्य सरकार और उच्च शिक्षा विभाग द्वारा दायर जवाब में स्वयं यह स्वीकार किया गया है कि धर्मशाला परिसर से संबंधित भूमि हस्तांतरण प्रक्रिया अभी भी पूरी नहीं हुई है और यह प्रक्रिया जारी है। इसके अतिरिक्त परियोजना के लिए आवश्यक लगभग 30 करोड़ रुपये की राशि का प्रावधान भी अब तक नहीं किया गया है। सरकार की ओर से दायर शपथ पत्र में बताया गया है कि धनराशि के आवंटन का मामला वित्त विभाग और योजना विभाग के समक्ष विचाराधीन है। याचिकाकर्ता पक्ष का कहना था कि परियोजना के क्रियान्वयन में वित्तीय और प्रशासनिक स्तर पर लंबित प्रक्रियाओं की स्थिति स्पष्ट रूप से सामने आनी चाहिए।

परियोजना की प्रगति पर मांगी स्पष्ट जानकारी

याचिकाकर्ता पक्ष ने न्यायालय को बताया कि सरकार द्वारा दाखिल जवाब में परियोजना की वास्तविक प्रगति के संबंध में पर्याप्त विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया है। उनके अनुसार जवाब में केवल सामान्य स्तर की जानकारी और भविष्य में कार्रवाई किए जाने के संकेत दिए गए हैं, जबकि परियोजना के विभिन्न चरणों की वर्तमान स्थिति, कार्यान्वयन की समय-सीमा, संबंधित विभागों की जिम्मेदारियां, अब तक किए गए कार्य, लंबित प्रक्रियाएं तथा संभावित पूर्णता तिथि का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है। याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि केवल मामलों के विचाराधीन होने का उल्लेख करने से परियोजना की वास्तविक स्थिति स्पष्ट नहीं होती और इससे यह आकलन करना कठिन हो जाता है कि परिसर निर्माण कार्य किस चरण में है।

राज्य सरकार से मांगी गई विस्तृत रिपोर्ट

याचिकाकर्ता ने न्यायालय से अनुरोध किया कि राज्य सरकार को एक समेकित और विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया जाए। इस रिपोर्ट में धर्मशाला परिसर परियोजना की मौजूदा स्थिति, भूमि हस्तांतरण प्रक्रिया की प्रगति, लगभग 30 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध न होने के कारण, वित्तीय स्वीकृतियों की स्थिति तथा स्टेज-1 मंजूरी मिलने के बाद संबंधित विभागों द्वारा उठाए गए ठोस कदमों का पूरा विवरण शामिल किया जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए कौन-कौन से प्रशासनिक और वित्तीय निर्णय लंबित हैं तथा उन्हें पूरा करने की संभावित समय-सीमा क्या है।

22 जुलाई तक रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश

मामले की सुनवाई के बाद उच्च न्यायालय ने प्रतिवादियों को 22 जुलाई तक अथवा उससे पहले विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का समय दिया है। अदालत ने निर्देश दिया है कि रिपोर्ट में परियोजना की वर्तमान स्थिति से संबंधित सभी आवश्यक तथ्य और अद्यतन जानकारी शामिल की जाए। न्यायालय ने यह भी संकेत दिया कि यदि निर्धारित समयावधि के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की जाती है तो मामले में आगे की कार्यवाही के दौरान उपयुक्त आदेश पारित किए जा सकते हैं, जिसमें लागत लगाने पर भी विचार किया जा सकता है।

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