डिजिटल अरेस्ट के नाम पर पुलिस-CBI अधिकारी बन रहे ठग, नुकसान होने पर तुरंत 1930 पर करें कॉल
हिमाचल प्रदेश पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर हो रही साइबर ठगी को लेकर लोगों को सतर्क किया है। ठग फोन या वीडियो कॉल पर खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी, आरबीआई, कस्टम विभाग अथवा कूरियर कंपनी का अधिकारी बताकर गिरफ्तारी का डर दिखाते हैं। पुलिस ने कहा है कि खाते से पैसे निकलने पर पीड़ित बिना देर किए राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें और संबंधित बैंक या वित्तीय संस्था को भी तत्काल सूचना दें।
शिमला
हिमाचल प्रदेश पुलिस के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक एवं साइबर अपराध जांच अधिकारी नरवीर सिंह राठौर ने लोगों से ऐसी कॉल आने पर घबराने के बजाय सावधान रहने की अपील की है। उन्होंने बताया कि साइबर ठग लोगों को डराकर पैसे ऐंठने के लिए डिजिटल अरेस्ट का तरीका अपना रहे हैं। वे लोगों से कहते हैं कि उनके नाम का कोई पार्सल पकड़ा गया है या उनका मोबाइल नंबर, आधार कार्ड अथवा बैंक खाता किसी आपराधिक मामले से जुड़ा है। इसके बाद गिरफ्तारी और जेल भेजने की धमकी देकर पैसे मांगे जाते हैं।
ठगी होने पर तुरंत दर्ज कराएं शिकायत
राठौर ने कहा कि साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है। यदि किसी व्यक्ति के खाते से पैसे निकल चुके हैं तो शिकायत करने में बिल्कुल देरी नहीं करनी चाहिए। पीड़ित 1930 पर फोन करने के साथ cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत भी दर्ज कर सकता है। ठगी के बाद आरोपी का फोन नंबर, कॉल से जुड़ी जानकारी, व्हाट्सऐप संदेश, स्क्रीनशॉट और बैंक लेन-देन का पूरा विवरण सुरक्षित रखा जाना चाहिए। वीडियो कॉल या अन्य माध्यम से भेजे गए दस्तावेज भी जांच के लिए संभालकर रखने की सलाह दी गई है।
संदिग्ध कॉल पर न करें भुगतान
पुलिस ने कहा है कि संदिग्ध फोन आने पर शांत रहें और कॉल करने वाले के कहने पर कोई राशि ट्रांसफर न करें। वीडियो कॉल पर दिखाई दे रहे व्यक्ति की पहचान या वर्दी पर तुरंत भरोसा नहीं करना चाहिए। संबंधित विभाग का नंबर उसकी आधिकारिक वेबसाइट से लेकर स्वयं संपर्क कर जानकारी की पुष्टि करें। मामले की सूचना परिवार के किसी सदस्य या भरोसेमंद व्यक्ति को भी दें। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि वीडियो कॉल पर पुलिस की वर्दी में दिखाई देने वाला व्यक्ति जरूरी नहीं कि वास्तविक अधिकारी हो।