HNN/ नाहन
दिवाली हिंदू धर्म में सबसे बड़ा और विशेष त्योहार है। कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को दीपावली पर्व परंपरा अनुसार मनाया जाता है। इस साल दिवाली 24 अक्तूबर 2022, सोमवार को पड़ रही है। धनतेरस से भाई दूज तक करीब 5 दिनों तक चलने वाला दिवाली का त्योहार हिमाचल प्रदेश में हर्षोल्लास से मनाया जाता है। दीपावली को दीप उत्सव भी कहा जाता है, क्योंकि दीपावली का मतलब होता है दीपों की अवली यानि पंक्ति। दिवाली का त्योहार अंधकार पर प्रकाश की विजय को दर्शाता है। हिंदू धर्म के अलावा बौद्ध, जैन और सिख धर्म के अनुयायी भी दिवाली मनाते हैं। इस दिन घरों में मां लक्ष्मी और भगवान गणेश का पूजन किया जाता है। यह पर्व हर्षोल्लास और सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
दिवाली का शुभ मुहूर्त
इस बार 24 अक्तूबर और 25 अक्तूबर दोनों दिन ही अमावस्या तिथि पड़ रही है, लेकिन 25 अक्तूबर को अमावस्या तिथि प्रदोष काल से पहले ही समाप्त हो रही है। 24 अक्तूबर को प्रदोष काल में अमावस्या तिथि होगी। उस दिन निशीथ काल में भी अमावस्या तिथि रहेगी। इसलिए 24 अक्तूबर को ही पूरे देश में दीवाली मनाई जाएगी। 23 अक्तूबर, रविवार को त्रयोदशी तिथि शाम 6 बजकर 4 मिनट तक रहेगी। उसके बाद चतुर्दशी तिथि शुरू होगी। चतुर्दशी तिथि 24 अक्तूबर, सोमवार को शाम 5 बजकर 28 मिनट पर समाप्त होगी और उसके बाद अमावस्या तिथि शुरू हो जाएगी। 25 अक्तूबर, मंगलवार को अमावस्या शाम 4 बजकर 19 मिनट तक रहेगी।
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दिवाली पर पूजा की विधि
दिवाली पर लक्ष्मी पूजा का विशेष विधान है। इस दिन संध्या और रात्रि के समय शुभ मुहूर्त में मां लक्ष्मी, विघ्नहर्ता भगवान गणेश और माता सरस्वती की पूजा और आराधना की जाती है। पहले घर की साफ़ सफाई करें और फिर घर के द्वार पर रंगोली और दीयों को लगाएं। पूजा स्थल पर एक चौकी रखें और लाल कपड़ा बिछाकर उस पर लक्ष्मी जी और गणेश जी की मूर्ति रखें या दीवार पर लक्ष्मी जी का चित्र लगाएं। चौकी के पास जल से भरा एक कलश रखें। माता लक्ष्मी और गणेश जी की मूर्ति पर तिलक लगाएं और दीपक जलाकर जल, मौली, चावल, फल, गुड़, हल्दी, अबीर-गुलाल आदि अर्पित करें और माता महालक्ष्मी की स्तुति करे। इसके साथ देवी सरस्वती, मां काली, भगवान विष्णु और कुबेर देव की भी विधि विधान से पूजा करें।
दिवाली का महत्व
दिवाली में मुख्य रूप से लक्ष्मी गणेश का पूजन किया जाता है। मान्यताओं के अनुसार इस दिन मां लक्ष्मी सबके घर आशीर्वाद देने आती है। दिवाली के दिन शुभ मुहूर्त के अनुसार लक्ष्मी जी का पूजन विधिपूर्वक करने से सारी मनोकामनाएं पूरी होती है। ऐसा माना जाता है कि यह पर्व भगवान श्रीराम के लंकापति रावण पर विजय हासिल करने और 14 साल का वनवास पूरा कर घर लौटने की खुशी में मनाया जाता है। इसलिए इस दिन घरों को दीपों से सजाया जाता है।
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