HNN/ नाहन
24 अक्तूबर 2022 को हिंदूओ का सबसे बड़ा त्योहार दिवाली धूमधाम से मनाई जाएगी। दिवाली जीवन में सुख-समृद्धि और मां लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए सबसे बड़ा त्योहार मनाना जाता है। दिवाली का पर्व पांच दिनों तक लगातार चलता है। धनतेरस से पांच दिनो तक चलने वाला दीपोत्सव पर्व आरंभ हो जाता है। दीपावली का त्योहार देश-दुनिया में बड़े ही उत्साह के साथ हर वर्ष कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि पर मनाया जाता है।
दिवाली पर मां लक्ष्मी और गणेशजी की विशेष पूजा-आराधना की जाती है। मान्यता है कि दिवाली पर मां लक्ष्मी प्रगट हुईं थीं और दिवाली की रात को मां लक्ष्मी पृथ्वी पर आती हैं। जिन घरों में साफ-सफाई, सजावट और मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा और मंत्रों का जाप होता रहता है वहां पर अंश रूप में मां लक्ष्मी हमेशा के लिए विराजमान हो जाती हैं।
हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़ें: Join WhatsApp Group
दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश पूजा शुभ मुहूर्त
लक्ष्मी-गणेश पूजन का शुभ मुहूर्त- शाम 06 बजकर 54 मिनट से 08 बजकर 16 मिनट तक
लक्ष्मी पूजन की अवधि-1 घंटा 21 मिनट
प्रदोष काल – शाम 05 बजकर 42 मिनट से रात 08 बजकर 16 मिनट तक
वृषभ काल – शाम 06 बजकर 54 मिनट से रात 08 बजकर 50 मिनट तक
दिवाली लक्ष्मी पूजा महानिशीथ काल मुहूर्त
लक्ष्मी पूजा मुहूर्त- रात 11 बजकर 40 मिनट से लेकर 12 बजकर 31 मिनट तक
अवधि – 50 मिनट तक
लक्ष्मी पूजा विधि
सबसे पहले दिवाली के दिन सुबह जल्दी उठकर घर और पूजा स्थल की साफ-सफाई दोबारा से करें। फिर पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करें और घर के मुख्य द्वार पर रंगोली बनाएं। शाम को पूजा मुहूर्त को ध्यान में रखते हुए पूजा स्थल पर एक चौकी रखें और फिर उसके ऊपर लाल कपड़ा बिछाएं। चौकी पर लाल कपड़ा बिछाने के बाद उसके ऊपर बाजार से खरीदकर लाई गई नई लक्ष्मी-गणेश, भगवान कुबेर और मां सरस्वती की प्रतिमा को स्थापित करें।
इसके बाद प्रतिमा के सामने कलश में जल भरकर और आम की पत्तियां लगाकर रखें। मां लक्ष्मी और भगवान गणेश समेत सभी देवी-देवताओं का आह्वान करते हुए सभी मूर्तियों पर तिलक लगाएं और दीपक जलाकर जल, मौली, जनेऊ, अक्षत, फल, हल्दी और पुष्प अर्पित करते हुए मां लक्ष्मी की स्तुति करें। माता लक्ष्मी की स्तुति के बाद देवी सरस्वती, मां काली, भगवान विष्णु और कुबेर देव की भी विधि विधान से पूजा करें।
दिवाली पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करते समय घर पर मौजूद सभी सदस्यों को वहां पर एकत्रित होना चाहिए। महालक्ष्मी पूजन के बाद घर की तिजोरी, बहीखाते, पुस्तकों और व्यापारिक संसाधनों की पूजा करें। अंत में घर के हर एक हिस्से में घी और तेल का दीपक जलाकर घर को रोशन करें और प्रसाद ग्रहण करें।
📢 लेटेस्ट न्यूज़
हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़ें
ताज़ा खबरों और अपडेट्स के लिए अभी हमारे WhatsApp ग्रुप का हिस्सा बनें!
Join WhatsApp Group





