अंतरराष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस पर एसएआई धर्मशाला में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित
अंतरराष्ट्रीय नशा निरोधक एवं अवैध तस्करी विरोधी दिवस के अवसर पर भारतीय खेल प्राधिकरण के नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, धर्मशाला में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक किया गया।
धर्मशाला
जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन
अंतरराष्ट्रीय नशा निरोधक एवं अवैध तस्करी विरोधी दिवस के अवसर पर भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (NCOE), धर्मशाला में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह दिवस हर वर्ष 26 जून को मनाया जाता है और इसका उद्देश्य नशे के दुष्प्रभावों तथा अवैध मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ जन-जागरूकता बढ़ाना है। कार्यक्रम में युवाओं को नशे से दूर रहने, स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और समाज में नशा मुक्त वातावरण के निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित किया गया।
नशा मुक्ति की दिलाई गई शपथ
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित अधिकारियों, प्रशिक्षुओं और युवाओं ने नशे के विरुद्ध सामूहिक शपथ ली। प्रतिभागियों को नशे के स्वास्थ्य, सामाजिक और मानसिक प्रभावों के बारे में जानकारी दी गई तथा यह बताया गया कि नशे की आदत व्यक्ति के शारीरिक स्वास्थ्य, पारिवारिक जीवन और शैक्षणिक या व्यावसायिक गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है। कार्यक्रम में स्वस्थ, अनुशासित और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने पर बल दिया गया।
अधिकारियों ने साझा किए विचार
कार्यक्रम में मेरा युवा भारत (MY Bharat) कांगड़ा के उप निदेशक ध्रुव डोगरा, एसएआई के सहायक निदेशक जय शानी, अनुभाग अधिकारी तुषार सिंह तथा कार्यालय सहायक जानवी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने युवाओं से अपील की कि वे स्वयं नशे से दूर रहें और अपने आसपास के लोगों को भी इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करें। उन्होंने कहा कि नशा निरोधक अभियानों में संस्थागत भागीदारी के साथ-साथ युवाओं की सक्रिय भूमिका भी आवश्यक है।
युवाओं की सहभागिता पर दिया गया जोर
कार्यक्रम के दौरान यह भी बताया गया कि जागरूकता गतिविधियों में युवाओं की भागीदारी नशा निरोधक अभियानों को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। अधिकारियों ने कहा कि विद्यालयों, महाविद्यालयों, खेल संस्थानों और सामुदायिक स्तर पर इस तरह के कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाने चाहिए, ताकि नशे के खिलाफ संदेश व्यापक स्तर तक पहुंचे। साथ ही समाज में स्वास्थ्य संबंधी सकारात्मक व्यवहार को बढ़ावा देने और नशा मुक्त भारत के लक्ष्य की दिशा में सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।
