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Election / इंदौरा पंचायत समिति चुनाव रोकने पर हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन • 1 Hour Ago • 1 Min Read

Election / हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पंचायत समिति इंदौरा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव रोकने के फैसले पर कड़ा संज्ञान लिया है। न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की अदालत ने उपमंडल अधिकारी नागरिक एवं कार्यकारी मजिस्ट्रेट इंदौरा के चुनाव टालने के निर्णय को अधिकारहीन, गैरकानूनी और लोकतांत्रिक सिद्धांतों के विरुद्ध बताया है। अदालत को सुनवाई के दौरान बताया गया कि चुनाव के लिए 13 अगस्त की तारीख तय कर दी गई है।

शिमला

हाईकोर्ट ने कहा कि पंचायती राज अधिनियम, 1994 के तहत किसी अधिकारी को शिकायत या जांच के आधार पर चुनाव रोकने का अधिकार नहीं है। चुनाव में धांधली या भ्रष्ट आचरण से संबंधित आरोपों का निपटारा चुनाव संपन्न होने के बाद चुनाव याचिका के माध्यम से ही किया जा सकता है। अदालत ने टिप्पणी की कि निष्पक्षता के नाम पर कार्यकारी शक्तियों का इस तरह इस्तेमाल तानाशाही की छाप छोड़ता है और चुनी हुई लोकतांत्रिक संस्थाओं के काम में सीधा अवरोध पैदा करता है।

राज्य सरकार ने अदालत में कहा था कि एसडीएम ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 14 के तहत कार्यकारी मजिस्ट्रेट की शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए निष्पक्षता बनाए रखने के लिए एसडीपीओ इंदौरा की जांच रिपोर्ट का इंतजार किया था। हाईकोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। अधिकारियों ने सुनवाई के दौरान बताया कि जांच में कोई साक्ष्य नहीं मिलने के बाद चुनाव की तारीख 13 अगस्त निर्धारित कर दी गई है। अदालत ने निर्धारित तिथि पर चुनाव कराने का निर्देश दिया है।

मुख्य सचिव के माध्यम से फैसला भेजने का आदेश

हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव के माध्यम से सभी संबंधित अधिकारियों को फैसले की प्रति भेजने का आदेश दिया, ताकि भविष्य में इस तरह शक्तियों का दुरुपयोग न हो। पंचायत समिति इंदौरा के चुनाव के बाद 26 निर्वाचित सदस्यों ने 8 जून को शपथ ली थी। इसके तुरंत बाद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव होना था, लेकिन एक बाहरी व्यक्ति की ओर से धनबल और हॉर्स-ट्रेडिंग की शिकायत किए जाने के कारण एसडीएम ने चुनाव की तारीख तय नहीं की। इस देरी के खिलाफ सदस्य अंकुश इंदौरिया ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

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