बुजुर्ग पेंशनर्स को आंदोलन के लिए मजबूर कर रही सुक्खू सरकार : बिंदल
डेढ़ लाख सेवानिवृत्त कर्मचारियों के चिकित्सा बिल, डीए और एरियर लंबित होने का आरोप; स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी सरकार पर साधा निशाना
नाहन
हमीरपुर, 4 नवंबर। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने प्रदेश की सुक्खू सरकार पर पेंशनर्स और कर्मचारियों की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जीवन के 30 से 40 वर्ष प्रदेश की सेवा में बिताने वाले सेवानिवृत्त कर्मचारियों को आज अपने ही वित्तीय अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि 80 वर्ष तक के बुजुर्गों को भी घर-बार छोड़कर आंदोलन करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
हमीरपुर में पूर्व कर्मचारी प्रकोष्ठ के जिला स्तरीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए डॉ. बिंदल ने आरोप लगाया कि प्रदेश के करीब डेढ़ लाख सेवानिवृत्त कर्मचारियों के चिकित्सा बिलों का भुगतान, महंगाई भत्ते की किश्तें और एरियर लंबे समय से लंबित हैं। उन्होंने कहा कि पेंशनर्स पिछले चार वर्षों से अपने वित्तीय लाभों के लिए सरकार से गुहार लगा रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा। उन्होंने इसे कांग्रेस सरकार की कर्मचारी और पेंशनर विरोधी सोच करार दिया।
डॉ. बिंदल ने कहा कि 80 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों को भी 200 से 400 किलोमीटर की यात्रा कर धरने-प्रदर्शन में शामिल होना पड़ रहा है। जीवनभर प्रदेश की सेवा करने वाले कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद सम्मान और आर्थिक सुरक्षा मिलनी चाहिए, लेकिन उन्हें अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरना पड़ रहा है।
स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी सरकार पर हमला
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों की जांच सुविधाएं प्रभावित हो रही हैं। लैब संचालकों के करोड़ों रुपये के भुगतान लंबित होने के कारण मरीजों को निजी अस्पतालों और प्रयोगशालाओं में महंगे टेस्ट करवाने पड़ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि सरकारी अस्पतालों में ऑपरेशन की संख्या घटकर पहले के मुकाबले एक चौथाई रह गई है। हिमकेयर और आयुष्मान भारत योजनाओं के तहत अस्पतालों के भुगतान लंबित होने से उपचार व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
108 एम्बुलेंस सेवा पर भी उठाए सवाल
डॉ. बिंदल ने 108 एम्बुलेंस सेवा की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि सरकार की ओर से संचालन से जुड़े भुगतान समय पर नहीं किए जा रहे हैं। इसके चलते कई बार मरीजों को एम्बुलेंस के लिए दो-दो घंटे तक इंतजार करना पड़ता है, जबकि इस सेवा का निर्धारित रिस्पांस टाइम 15 से 20 मिनट बताया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी अस्पतालों में जांच, दवाइयों और आपातकालीन सेवाओं की स्थिति लगातार कमजोर हो रही है, जिसका सबसे ज्यादा असर गरीब और जरूरतमंद परिवारों पर पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाएं किसी भी सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होती हैं, लेकिन प्रदेश में वित्तीय कुप्रबंधन और भुगतान में देरी का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। डॉ. बिंदल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार पेंशनर्स के वित्तीय अधिकारों और आम जनता की स्वास्थ्य सुविधाओं, दोनों मोर्चों पर विफल रही है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश के कर्मचारी, पेंशनर्स और आम जनता सरकार की नीतियों से निराश हैं और आने वाले समय में इसका राजनीतिक जवाब देंगे।