FIR / एपीके फाइल इंस्टॉल कराकर खाते से 5.48 लाख निकाले, फर्जी बैंक मैनेजर बनकर दिया झांसा
FIR / कांगड़ा जिले के शाहपुर क्षेत्र में 67 वर्षीय सेवानिवृत्त वन अधिकारी से क्रेडिट कार्ड बनवाने के नाम पर 5.48 लाख रुपये की साइबर ठगी हुई है। आरोपी ने खुद को बैंक मैनेजर बताकर वीडियो कॉल के माध्यम से भरोसा दिलाया और व्हाट्सऐप पर भेजी गई एपीके फाइल मोबाइल में इंस्टॉल करवा दी। इसके बाद फोन ने काम करना बंद कर दिया और पीड़ित के सावधि जमा व बचत खातों से 10 लेनदेन के जरिए रकम निकाल ली गई।
कांगड़ा/शाहपुर
पीड़ित के अनुसार, उन्होंने 25 सितंबर को क्रेडिट कार्ड बनवाने के लिए इंटरनेट पर भारतीय स्टेट बैंक का संपर्क नंबर खोजा था। ऑनलाइन मिले नंबर पर कॉल करने के बाद संबंधित व्यक्ति ने स्वयं को बैंक की रैत शाखा का मैनेजर बताया। सेवानिवृत्त अधिकारी ने उसे जानकारी दी कि 65 वर्ष से अधिक आयु होने के कारण बैंक ने क्रेडिट कार्ड जारी करने से मना किया है। इस पर आरोपी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी कर क्रेडिट कार्ड बनवाने का भरोसा दिया।
व्हाट्सऐप पर भेजी कस्टमर सपोर्ट एपीके फाइल
आरोपी ने वीडियो कॉल के दौरान पीड़ित के व्हाट्सऐप नंबर पर कस्टमर सपोर्ट नाम से एक एपीके फाइल भेजी। उसने कहा कि क्रेडिट कार्ड की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए इस फाइल को इंस्टॉल करना जरूरी है। पीड़ित ने फाइल मोबाइल में इंस्टॉल कर दी, जिसके तुरंत बाद फोन ने काम करना बंद कर दिया। करीब एक घंटे बाद लैपटॉप पर इंटरनेट बैंकिंग जांचने पर पता चला कि सावधि जमा और बचत खातों से कुल 5,48,000 रुपये 10 अलग-अलग लेनदेन के माध्यम से निकाले जा चुके थे।
साइबर थाने ने दर्ज की जीरो एफआईआर
ठगी का पता चलते ही पीड़ित ने साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज करवाई। साइबर अपराध थाना धर्मशाला ने मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत जीरो एफआईआर दर्ज की है। आगामी जांच के लिए मामला शाहपुर पुलिस थाने को भेज दिया गया है। पुलिस अब शिकायत और बैंक खातों से हुए लेनदेन के आधार पर मामले की जांच आगे बढ़ाएगी।
आधिकारिक माध्यम से ही लें बैंक का नंबर
साइबर सुरक्षा संबंधी सलाह के अनुसार एपीके फाइल एंड्रॉयड मोबाइल में ऐप इंस्टॉल करने के लिए इस्तेमाल होती है और अनजान व्यक्ति के कहने पर इसे डाउनलोड करना जोखिम भरा हो सकता है। बैंक का हेल्पलाइन नंबर संबंधित बैंक की आधिकारिक वेबसाइट या अधिकृत माध्यम से ही लेना चाहिए। किसी अज्ञात व्यक्ति को ओटीपी, पासवर्ड, यूपीआई पिन या बैंकिंग जानकारी नहीं देनी चाहिए। संदिग्ध फाइल इंस्टॉल होने या ठगी की आशंका पर इंटरनेट कनेक्शन बंद कर तुरंत बैंक और 1930 हेल्पलाइन से संपर्क करना चाहिए।