HNN/ नाहन
गोवर्धन पूजा का हिंदू धर्म में बेहद ही खास महत्व है। यह हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है, जिसे लोग बेहद श्रद्धा भाव से मनाते हैं। मगर इस बार सूर्य ग्रहण के कारण गोवर्धन पूजा का पर्व दिवाली के अगले दिन नहीं मनाया जाएगा। दिवाली के अगले दिन सूर्य ग्रहण होने के कारण गोवर्धन पूजा अब 26 अक्तूबर को मनाई जाएगी। दरअसल, धार्मिक नजरिए से ग्रहण को अशुभ माना गया है और ग्रहण में किसी भी तरह का शुभ काम और पूजा-पाठ वर्जित हो जाता है।
इस बार दिवाली के अगले दिन यानी 25 अक्टूबर को ग्रहण लगने जा रहा है जोकि आंशिक ग्रहण होगा। दिवाली के अगले दिन ग्रहण होने से इस बार महापर्व के दौरान सूर्यग्रहण का साया रहेगा। दिवाली के अगले दिन ग्रहण होने से गोवर्धन पूजा दिवाली के तीसरे दिन मनाई जाएगी। ऐसे में पहले जहां दिवाली के अगले दिन गोवर्धन पूजा और फिर अगले दिन भाईदूज मनाया जाता है, हर साल हमेशा ऐसा ही होता आ रहा है, लेकिन इस बार 27 वर्षों बाद ऐसा हो रहा है जब गोवर्धन पूजा दिवाली के अगले दिन नहीं दूसरे दिन होगी।
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गोवर्धन पूजा 2022 शुभ मुहूर्त
गोवर्धन पूजा प्रातः काल मुहूर्त- सुबह 06 बजकर 36 मिनट से सुबह 08 बजकर 55 मिनट तक
प्रतिपदा तिथि प्रारम्भ- अक्तूबर 25, 2022 को शाम 04 बजकर 18 मिनट से शुरू
प्रतिपदा तिथि समाप्त- अक्तूबर 26, 2022 को शाम 02 बजकर 42 मिनट पर खत्म
गोवर्धन पूजा नियम और विधि
गोवर्धन पूजा के दिन गोबर से गोवर्धन बनाकर उसे फूलों से सजाया जाता है। पूजा के दौरान गोवर्धन पर धूप, नैवेद्य, दीप फूल और फल आदि चढ़ाए जाते हैं। इस दिन गोबर से गोवर्धन जी को लेटे हुए पुरुष के रूप में बनाया जाता है। नाभि की जगह पर मिट्टी का दीया रखा जाता है। इस दीपक में दूध, दही, गंगाजल, शहद और बताशे आदि डाले जाते हैं।
फिर इसे बाद में प्रसाद के रूप में बांटा जाता है। पूजा करने के बाद गोवर्धन जी की सात बार परिक्रमा लगाई जाती है। परिक्रमा के वक्त हाथ में लोटे से जल गिराते हुए और जौ बोते हुए परिक्रमा की जाती है। गोवर्धन पूजा के दिन भगवान विश्वकर्मा की पूजा भी की जाती है। इस मौके पर मशीनों और कारखानों की पूजा की जाती है।
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