Government Decision : स्टाफ नर्सों की आउटसोर्स भर्ती नहीं होगी, पार्ट टाइम मल्टी टास्क वर्कर होंगे नियमित
Government Decision: हिमाचल प्रदेश में अब स्टाफ नर्सों की भर्ती आउटसोर्स आधार पर नहीं होगी। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने विधानसभा में बताया कि राज्य चयन आयोग लिखित परीक्षा कराएगा और मेरिट के आधार पर अभ्यर्थियों का चयन होगा। नीति के तहत नियुक्त पार्ट टाइम मल्टी टास्क वर्करों को नियमित करने और सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन देने की भी बात कही गई है।
शिमला
मुख्यमंत्री ने बुधवार को विधानसभा के प्रश्नकाल के दौरान कहा कि सरकार स्वास्थ्य विभाग में आउटसोर्स भर्तियां कम करने की शुरुआत कर रही है। स्टाफ नर्सों की नियुक्ति के लिए राज्य चयन आयोग के माध्यम से परीक्षा आयोजित की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि चयन में किसी की सिफारिश स्वीकार नहीं होगी। मुख्यमंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री या विधानसभा अध्यक्ष सहित किसी की सिफारिश के बजाय लिखित परीक्षा की मेरिट में स्थान बनाने वाले अभ्यर्थी को ही नौकरी दी जाएगी।
पैरा मेडिकल पद मौजूदा भर्ती नियमों से भरेंगे
मुख्यमंत्री के अनुसार पैरा मेडिकल स्टाफ के पद फिलहाल वर्तमान भर्ती नियमों के तहत भरे जाएंगे, जबकि भविष्य में इन पदों की भर्ती व्यवस्था बदलने पर विचार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि नीति के अंतर्गत नियुक्त पार्ट टाइम मल्टी टास्क वर्करों को नियमित किया जाएगा और सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें पेंशन का लाभ मिलेगा। आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति कंपनियों के माध्यम से होती है, लेकिन बिना कारण वेतन काटने की शिकायत मिलने पर संबंधित कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन को नोडल एजेंसी बनाया गया है, जो टेंडर जारी कर कंपनियों को काम आवंटित करती है। नाइलेट के माध्यम से भी आउटसोर्स आधार पर कर्मचारी रखे जाते हैं। कोविड काल में हटाए गए कई आउटसोर्स कर्मचारियों को दोबारा नौकरी देने की प्रक्रिया शुरू की गई है। जो कर्मचारी अभी नियुक्ति से वंचित हैं, उन्हें भी रखने का प्रयास किया जाएगा। अस्पताल में स्वीकृत पदों से कम आउटसोर्स कर्मचारी नियुक्त करने के मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
विपक्ष ने आउटसोर्स एजेंसियों पर उठाए सवाल
प्रश्नकाल में विधायक दीपराज के मूल सवाल के साथ नेता विपक्ष जयराम ठाकुर, रणधीर शर्मा, राकेश जमवाल और हंसराज ने आउटसोर्स भर्तियों से जुड़े मुद्दे उठाए। जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ चुके लोगों और पार्टी पदाधिकारियों को आउटसोर्स भर्ती का ठेकेदार बनाया गया है। उन्होंने नई आउटसोर्स एजेंसियों के पंजीकरण को जांच का विषय बताया। मुख्यमंत्री ने जवाब दिया कि कंपनियों के एंपेनलमेंट से संबंधित पूर्व सरकार के समय के नियम ही लागू हैं और इनमें अधिक बदलाव नहीं किया गया है।
विधायक दीपराज ने आउटसोर्स कर्मचारियों को हटाने, शिलाई में करीब 700 लोगों को इस माध्यम से लगाने और करसोग में जलवाहक नियुक्त करने के लिए 500 रुपये शुल्क लेने का मामला उठाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आउटसोर्स व्यवस्था में सेवाएं आउटसोर्स की जाती हैं और सरकारी नीति में व्यक्तियों को सीधे नियुक्त करने की प्रक्रिया नहीं है। उन्होंने शिलाई से जुड़े दावे के तथ्य सदन के पटल पर रखने को कहा। विधायक हंसराज ने आउटसोर्स कर्मचारियों की नीति पर सवाल किया, जबकि विधायक राकेश जमवाल ने सुंदरनगर के ऑक्सीजन प्लांट को दोबारा चलाने का विषय उठाया।