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हाईकोर्ट के निर्देश पर NH-5 से हटेंगे अतिक्रमण, अवैध पार्किंग और व्यावसायिक कब्जों पर कार्रवाई

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन2 • 28 May 2026 • 1 Min Read

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्ग-5 पर अवैध अतिक्रमण, पार्किंग और व्यावसायिक उपयोग को लेकर राज्य सरकार को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने संबंधित विभागों को सड़क सुरक्षा, निगरानी और यातायात प्रबंधन से जुड़े उपाय सुनिश्चित करने को कहा है।

शिमला

एनएच-5 पर अतिक्रमण हटाने के निर्देश

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्ग-5 पर बढ़ते अतिक्रमण, अवैध पार्किंग और व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर राज्य सरकार और संबंधित विभागों को विस्तृत निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने शिमला, ठियोग, नारकंडा, कुमारसैन और रामपुर बुशहर मार्ग पर स्थित उन सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, अस्थायी ढांचों और बिलबोर्डों को हटाने को कहा है, जो निजी परिसरों के बजाय राष्ट्रीय राजमार्ग अथवा उससे संबंधित भूमि पर स्थापित किए गए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय राजमार्गों का प्राथमिक उद्देश्य यातायात संचालन और सार्वजनिक आवागमन है तथा इन्हें व्यावसायिक उपयोग के लिए परिवर्तित नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि व्यवसाय संचालकों की जिम्मेदारी है कि वे अपने प्रतिष्ठानों के लिए वैध और निर्धारित स्थानों का उपयोग करें ताकि सड़क सुरक्षा और यातायात व्यवस्था प्रभावित न हो।

अवैध पार्किंग और ढाबों पर कार्रवाई के निर्देश

कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि राष्ट्रीय राजमार्ग-5 पर दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की पहचान कर वहां पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही भारी वाहनों और ट्रकों के लिए निर्धारित पार्किंग स्थलों का निर्माण करने, सड़क किनारे अवैध पार्किंग रोकने और नियमित निरीक्षण करने को कहा गया है। अदालत ने यह भी निर्देश दिए कि सड़क किनारे बिना अनुमति संचालित ढाबों, भोजनालयों और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए। कोर्ट ने कहा कि कई स्थानों पर सड़क किनारे अनियोजित पार्किंग और अस्थायी व्यावसायिक ढांचे यातायात बाधित कर रहे हैं, जिससे दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ती है। ऐसे मामलों में संबंधित विभागों को संयुक्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

पुलिस को नियमित गश्त और निगरानी सुनिश्चित करने के आदेश

हाईकोर्ट ने पुलिस अधीक्षक शिमला को निर्देश दिए हैं कि एसएचओ ढली के माध्यम से पूरे मार्ग पर नियमित गश्त सुनिश्चित की जाए और यातायात प्रबंधन के लिए पर्याप्त संख्या में पुलिस कर्मियों की तैनाती की जाए। अदालत ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर अवैध पार्किंग, सड़क किनारे वाहनों की अनधिकृत रुकावट और व्यावसायिक गतिविधियों पर निगरानी बनाए रखना पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी है। कोर्ट ने यह भी कहा कि संबंधित पुलिस अधिकारी बिना किसी बाहरी हस्तक्षेप के नियमों के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करें। अदालत के समक्ष दायर हलफनामे में यह भी उल्लेख किया गया था कि कुछ ट्रक और टैक्सी ऑपरेटर राजनीतिक प्रभाव का उपयोग कर यातायात व्यवस्था प्रभावित कर रहे हैं, जिस पर अदालत ने गंभीरता से संज्ञान लिया।

पर्यटन सीजन में यातायात प्रबंधन पर विशेष ध्यान

अदालत ने पर्यटन सीजन के दौरान यातायात दबाव को देखते हुए विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग और उससे संबंधित वन एवं सरकारी भूमि का व्यावसायिक उपयोग करने वाले बस ऑपरेटरों, टैक्सी संचालकों और अन्य प्रतिष्ठानों की गतिविधियों पर नियमित निगरानी रखी जाए ताकि पर्यटकों और स्थानीय लोगों की आवाजाही प्रभावित न हो। अदालत ने यह भी कहा कि पर्यटन सीजन में सड़क किनारे अनधिकृत पार्किंग और अस्थायी व्यावसायिक गतिविधियों के कारण यातायात बाधित होने की शिकायतें सामने आती रही हैं, इसलिए संबंधित विभागों को समन्वय के साथ कार्रवाई करनी होगी। कोर्ट ने सड़क सुरक्षा, यातायात नियंत्रण और सार्वजनिक सुविधा को प्राथमिकता देने पर जोर दिया।

आदेशों की अनुपालना नहीं होने पर कार्रवाई की चेतावनी

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि जारी निर्देशों के अनुसार कार्रवाई नहीं की गई तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई सहित अन्य कानूनी कदम उठाए जा सकते हैं। अदालत ने शिमला के उपमंडल मजिस्ट्रेट (शहरी) और अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (कानून व्यवस्था) को भी आदेशों की अनुपालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर यातायात व्यवस्था बनाए रखना और सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है तथा इस संबंध में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

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