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Himachal Budget 2023: हिमाचल सरकार 17 मार्च को पेश करेगी अपना पहला बजट, 29 को होगा पारित

Ankita • 16 Mar 2023 • 1 Min Read

HNN/ शिमला

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली हिमाचल प्रदेश सरकार का पहला वार्षिक बजट 17 मार्च को पेश होगा, जबकि यह 29 मार्च को पारित होगा। बजट सत्र 14 मार्च से शुरू हुआ और 6 अप्रैल को इसका समापन होगा। राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला ने 14 मार्च से विधानसभा का बजट सत्र बुलाने की अनुमति दे दी थी।

इसके बाद राजभवन ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी थी। राज्यपाल की सत्र बुलाने की अनुमति के बाद अब इस संबंध में हिमाचल प्रदेश विधानसभा सचिवालय ने भी सत्र की बैठकों की अस्थायी रूपरेखा जारी कर दी थी। इसके अनुसार 14 मार्च को 11 बजे बजट सत्र की शुरुआत प्रदेश विधानसभा के पूर्व सदस्यों के देहांत की स्थिति में उनके शोकोद्गार से हुई।

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू बतौर वित्त मंत्री पूर्वान्ह 11 बजे सदन में अपना पहला बजट भाषण पढ़ेंगे। मुख्यमंत्री की तरफ से कर मुक्त बजट प्रस्तुत किए जाने की संभावना जताई जा रही है। पहले बजट में सुक्खू कई नई योजनाओं की घोषणा भी कर सकते हैं, जिसमें चुनाव के समय कांग्रेस की तरफ से लाए गए घोषणा पत्र की झलक देखने को मिल सकती है।

बजट में नौकरी का पिटारा भी खुल सकता है। सुक्खू सरकार के पहले बजट से आम आदमी के अलावा कर्मचारी, महिलाओं और विशेषकर बेरोजगार युवाओं को काफी उम्मीदें हैं। 300 यूनिट मुफ्त बिजली, महिलाओं को 1500 रुपए मासिक सम्मान राशि, एक लाख युवाओं को रोजगार इत्यादि कांग्रेस की गारंटियों को पूरा करने के सरकारी दावों के मद्देनजर सभी की निगाहें बजट पर टिकीं हैं।

कृषि क्षेत्र के साथ हिमाचल में निवेश लाने के सरकार के प्रयासों के मद्देनजर उद्योगों के लिए भी बजट में कोई रियायत मिलने की उम्मीद है। हालांकि 75 हज़ार करोड़ रुपये के कर्ज में डूबे प्रदेश की जनता पर कोई नया बोझ डाले बिना, विकास योजनाओं के लिए धन की व्यवस्था करना सुक्खू के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी।

कांग्रेस द्वारा सरकारी कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना देने की गारंटी को पूरा करने में सुक्खू सरकार कामयाब रही है। हालांकि इसके लिए फंड की व्यवस्था करना सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण रहेगा। पुरानी पेंशन स्कीम के लिए सरकार को अपने संसाधनों के पैसे की व्यवस्था करनी होगी।

दरअसल नए वित्त वर्ष 2023-24 में भी मुख्यमंत्री के सामने वही पुराना आर्थिक संकट बरकरार है। आमदनी अठन्नी और खर्चा रुपया होने की वजह से प्रदेश पर कर्ज का बोझ बढ़ता ही जा रहा है।