15 साल बाद मुख्यमंत्री को देख बड़ा भंगाल के ग्रामीणों में उत्साह, क्षेत्र में उत्सवी माहौल
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कांगड़ा जिले के दुर्गम बड़ा भंगाल क्षेत्र का दौरा कर स्थानीय लोगों, किसानों और भेड़पालकों से संवाद किया। दौरे के दौरान उन्होंने विभिन्न विकास कार्यों, प्राकृतिक खेती और कृषि सहायता योजनाओं को लेकर सरकार की प्राथमिकताओं की जानकारी दी।
शिमला
दुर्गम क्षेत्र का दौरा
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कांगड़ा जिले के दुर्गम बड़ा भंगाल क्षेत्र का दौरा किया और स्थानीय लोगों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं, जरूरतों और क्षेत्र की भौगोलिक चुनौतियों की जानकारी ली। लगभग 15 साल बाद किसी मुख्यमंत्री के इस क्षेत्र में पहुंचने से स्थानीय स्तर पर यह दौरा महत्वपूर्ण माना गया। मुख्यमंत्री ने यहां रात्रि प्रवास भी किया, जिससे बड़ा भंगाल में किसी मुख्यमंत्री के पहली बार रात्रि ठहराव का रिकॉर्ड दर्ज हुआ।
स्थानीय लोगों से संवाद
मुख्यमंत्री ने स्थानीय निवासियों के साथ बैठक कर सड़क, परिवहन, स्वास्थ्य, शिक्षा, संचार और प्रशासनिक सेवाओं से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। ग्रामीणों ने क्षेत्र की कठिन परिस्थितियों, सीमित सुविधाओं और विकास कार्यों की जरूरतों को उनके समक्ष रखा। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि दुर्गम क्षेत्रों की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर देखा जाएगा और प्रशासन को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जाएंगे।
कृषि और पशुपालन पर चर्चा
मुख्यमंत्री ने किसानों के खेतों का निरीक्षण किया और राजमाह की खेती, उत्पादन, विपणन तथा स्थानीय कृषि गतिविधियों से जुड़े पहलुओं की जानकारी ली। उन्होंने भेड़पालकों से भी बातचीत कर पशुपालन से जुड़ी दिक्कतों, चारे की उपलब्धता, ऊन उत्पादन और बाजार से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था में कृषि और पशुपालन की अहम भूमिका है, इसलिए इनसे जुड़े लोगों को योजनाओं का लाभ समय पर मिलना चाहिए।
प्राकृतिक खेती पर सरकार का फोकस
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएं चला रही है और किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सरकार ने प्राकृतिक खेती से जुड़े उत्पादों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की व्यवस्था की है, ताकि किसानों को बाजार की अनिश्चितता से राहत मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि कृषि उत्पादों के बेहतर विपणन और स्थानीय स्तर पर आय बढ़ाने के लिए सरकार लगातार काम कर रही है।
समर्थन मूल्य की जानकारी
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने ऊन का समर्थन मूल्य 100 रुपये प्रति किलोग्राम निर्धारित किया है। इसके अलावा राजीव गांधी प्राकृतिक खेती स्टार्ट-अप योजना के तहत गेहूं का समर्थन मूल्य 60 रुपये से बढ़ाकर 80 रुपये प्रति किलोग्राम, मक्की का 40 रुपये से बढ़ाकर 50 रुपये प्रति किलोग्राम, पांगी घाटी में उत्पादित जौ का 60 रुपये से बढ़ाकर 80 रुपये प्रति किलोग्राम और हल्दी का 90 रुपये से बढ़ाकर 150 रुपये प्रति किलोग्राम किया गया है। अदरक के लिए 30 रुपये प्रति किलोग्राम का समर्थन मूल्य निर्धारित किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन प्रावधानों से किसानों और भेड़पालकों को सीधा लाभ मिलेगा।
सांस्कृतिक कार्यक्रम में सहभागिता
दौरे के दौरान मुख्यमंत्री स्थानीय पारंपरिक वेशभूषा चोला-डोरा में नजर आए और सांस्कृतिक कार्यक्रम में भाग लिया। उन्होंने स्थानीय लोगों के साथ पारंपरिक लोकनृत्य में भी सहभागिता की और क्षेत्र की सांस्कृतिक परंपराओं को करीब से देखा। इस दौरान स्थानीय संस्कृति, रीति-रिवाज और सामुदायिक जीवन से जुड़े पहलुओं को भी साझा किया गया।
अधिकारी और जनप्रतिनिधि रहे उपस्थित
इस अवसर पर स्थानीय विधायक किशोरी लाल, उपायुक्त हेमराज बैरवा, पुलिस अधीक्षक कुलभूषण वर्मा सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। अधिकारियों ने क्षेत्रीय आवश्यकताओं और विकास कार्यों से जुड़े विषयों पर मुख्यमंत्री को जानकारी दी।