हिमाचल में रातभर महसूस हुए तीन भूकंप के झटके, कई मकानों को नुकसान, अस्पताल भवन क्षतिग्रस्त
हिमाचल प्रदेश में रात के दौरान 5.0, 2.8 और 3.0 तीव्रता के तीन भूकंप दर्ज किए गए, जिनका केंद्र चंबा जिला रहा। भूकंप के बाद कांगड़ा और पालमपुर सहित कुछ क्षेत्रों में भवनों को नुकसान पहुंचने की सूचना मिली है, जबकि प्रशासन ने स्थिति पर निगरानी बनाए रखी है।
शिमला
भूकंप के तीन झटके दर्ज
हिमाचल प्रदेश में शुक्रवार रात लगातार तीन बार भूकंप के झटके महसूस किए गए। मौसम विज्ञान और भूकंप निगरानी एजेंसियों के अनुसार पहला और सबसे अधिक तीव्र झटका रात 10:04 बजे आया, जिसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 5.0 दर्ज की गई। इसके बाद रात 11:04 बजे 2.8 तीव्रता और 11:52 बजे 3.0 तीव्रता के दो अन्य झटके दर्ज किए गए। तीनों भूकंपों का केंद्र चंबा जिला क्षेत्र में बताया गया है। पहले झटके की तीव्रता अपेक्षाकृत अधिक होने के कारण इसका प्रभाव प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में महसूस किया गया। कई स्थानों पर लोग एहतियात के तौर पर घरों और अन्य भवनों से बाहर निकल आए। रात के समय आए इन झटकों के कारण लोगों में सतर्कता का माहौल बना रहा।
कांगड़ा और पालमपुर में नुकसान की सूचना
भूकंप के बाद जिला कांगड़ा के विभिन्न क्षेत्रों से संपत्ति को नुकसान पहुंचने की सूचनाएं सामने आई हैं। धर्मशाला क्षेत्र में कुछ मकानों की दीवारों और कमरों में दरारें आने की जानकारी मिली है। वहीं पालमपुर स्थित सिविल अस्पताल के पुराने भवन की दूसरी मंजिल की छत का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। घटना के समय अस्पताल में मरीज उपचाराधीन थे, लेकिन प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन के अनुसार किसी मरीज, चिकित्सक या कर्मचारी के घायल होने की सूचना नहीं है। अस्पताल भवन की तकनीकी जांच करवाई जा रही है ताकि संरचनात्मक स्थिति का आकलन किया जा सके। प्रशासन ने प्रभावित भवनों का निरीक्षण शुरू कर दिया है और नुकसान संबंधी रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
शाहपुर क्षेत्र में मकान प्रभावित
शाहपुर विधानसभा क्षेत्र के माहड़ गांव में भूकंप के कारण एक स्लेटपोश मकान को नुकसान पहुंचा है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार मकान की छत और अन्य हिस्सों में क्षति दर्ज की गई है, जिसके चलते भवन में रहना सुरक्षित नहीं माना जा रहा। प्रभावित परिवार ने प्रशासन से सहायता की मांग की है। राजस्व विभाग और स्थानीय प्रशासन की टीमों ने मौके का निरीक्षण कर क्षति का आकलन शुरू कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि विस्तृत रिपोर्ट मिलने के बाद नियमानुसार राहत और सहायता से संबंधित प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
प्रदेश और पड़ोसी राज्यों में महसूस हुए झटके
भूकंप के झटके केवल चंबा और कांगड़ा तक सीमित नहीं रहे, बल्कि शिमला, मंडी, हमीरपुर, ऊना, बिलासपुर, सोलन और अन्य जिलों में भी महसूस किए गए। इसके अलावा पड़ोसी राज्य पंजाब के कई क्षेत्रों में भी लोगों ने कंपन महसूस होने की जानकारी दी। पहले झटके के दौरान होटल, आवासीय भवनों और बहुमंजिला इमारतों में मौजूद लोग सुरक्षा के दृष्टिकोण से खुले स्थानों की ओर निकल आए। हालांकि प्रशासन की ओर से अब तक किसी बड़ी जनहानि की पुष्टि नहीं की गई है। विभिन्न जिलों में प्रशासनिक टीमें स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सक्रिय रखी गई हैं।
विशेषज्ञों ने बताया प्रभाव का कारण
भूकंप विज्ञान से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी भूकंप का प्रभाव केवल उसकी तीव्रता पर ही नहीं बल्कि उसकी गहराई और भौगोलिक स्थिति पर भी निर्भर करता है। कम गहराई में आने वाले भूकंप अपेक्षाकृत अधिक क्षेत्र में महसूस किए जाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि 5.0 तीव्रता का झटका हिमाचल प्रदेश में हाल के वर्षों में दर्ज हुए सामान्य भूकंपों की तुलना में अधिक प्रभावी रहा। पिछले दो दशकों में प्रदेश में अधिकांश भूकंप 2 से 4 रिक्टर स्केल के बीच दर्ज किए गए हैं, जबकि शुक्रवार रात का पहला झटका अपेक्षाकृत अधिक तीव्रता का था। यही कारण रहा कि इसके प्रभाव की जानकारी प्रदेश के कई जिलों से प्राप्त हुई।
कांगड़ा भूकंप का ऐतिहासिक संदर्भ
हिमाचल प्रदेश का कांगड़ा-चंबा क्षेत्र भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है और यह भूकंप संभावित जोन में शामिल है। वर्ष 1905 में कांगड़ा क्षेत्र में 7.8 तीव्रता का एक विनाशकारी भूकंप दर्ज किया गया था, जिसे देश के प्रमुख भूकंपों में गिना जाता है। उस भूकंप में हजारों लोगों की मृत्यु हुई थी और बड़ी संख्या में भवन क्षतिग्रस्त हुए थे। विशेषज्ञों का कहना है कि हिमालयी क्षेत्र की भूगर्भीय संरचना के कारण यहां समय-समय पर भूकंपीय गतिविधियां दर्ज होती रहती हैं। ऐसे में भवन निर्माण के दौरान निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन और आपदा प्रबंधन संबंधी तैयारियां अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।