Loading...

Employee / अध्ययन अवकाश पर कर्मचारियों को मिलेगा पूरा वेतन, सरकार ने संशोधित किए नियम

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन II • 1 Hour Ago • 1 Min Read

Employee : हिमाचल प्रदेश सरकार ने अध्ययन अवकाश पर जाने वाले कर्मचारियों को अवकाश अवधि के दौरान पूर्ण वेतन देने का प्रावधान लागू किया है। सरकार द्वारा नियमों में किए गए संशोधन के बाद कर्मचारी उच्च शिक्षा, शोध अथवा विशेष प्रशिक्षण के लिए अध्ययन अवकाश के दौरान 100 प्रतिशत वेतन प्राप्त कर सकेंगे। इसके साथ ही पुराने नियमों के तहत अध्ययन अवकाश ले चुके पात्र कर्मचारियों को भी वेतन अंतर राशि का लाभ प्रदान किया जाएगा, जिससे संशोधित प्रावधानों का लाभ व्यापक स्तर पर कर्मचारियों तक पहुंच सकेगा।

शिमला

अध्ययन अवकाश के नियमों में किया गया संशोधन

हिमाचल प्रदेश सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के लिए अध्ययन अवकाश से संबंधित नियमों में संशोधन किया है। संशोधित प्रावधानों के अनुसार अब सेवा के दौरान उच्च शिक्षा, शोध कार्य अथवा विशेष प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए अध्ययन अवकाश पर जाने वाले कर्मचारियों को अवकाश अवधि के दौरान पूर्ण वेतन मिलेगा। सरकार ने इस संबंध में केंद्रीय सिविल सेवा (अवकाश) नियम, 1972 के नियम-56 में संशोधन किया है। पहले अध्ययन अवकाश पर रहने वाले कर्मचारियों को उनके अवकाश से पूर्व प्राप्त वेतन का केवल 40 प्रतिशत हिस्सा दिया जाता था, जबकि अन्य स्वीकृत भत्ते नियमानुसार जारी रहते थे। नए प्रावधान लागू होने के बाद अध्ययन अवकाश की पूरी अवधि के दौरान कर्मचारियों को 100 प्रतिशत वेतन प्रदान किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे कर्मचारी उच्च शिक्षा और पेशेवर प्रशिक्षण के अवसरों का अधिक प्रभावी ढंग से लाभ उठा सकेंगे।

पूर्व कर्मचारियों को भी मिलेगा संशोधित लाभ

राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि संशोधित प्रावधानों का लाभ केवल भविष्य में अध्ययन अवकाश लेने वाले कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा। जिन कर्मचारियों ने पूर्व में पुराने नियमों के तहत अध्ययन अवकाश लिया था, उन्हें भी संशोधित व्यवस्था का लाभ प्रदान किया जाएगा। ऐसे कर्मचारियों को अध्ययन अवकाश अवधि के दौरान प्राप्त 40 प्रतिशत वेतन और अब निर्धारित पूर्ण वेतन के बीच की बकाया राशि का भुगतान किया जाएगा। सरकार के अनुसार यह निर्णय वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में की गई घोषणा के अनुरूप लागू किया गया है। इससे उन कर्मचारियों को भी लाभ मिलेगा जिन्होंने पहले उच्च शिक्षा या प्रशिक्षण के लिए अध्ययन अवकाश का उपयोग किया था।

उच्च शिक्षा और प्रशिक्षण को मिलेगा प्रोत्साहन

सरकारी प्रवक्ता के अनुसार अध्ययन अवकाश के दौरान पूर्ण वेतन की सुविधा कर्मचारियों को उच्च शिक्षा और उन्नत व्यावसायिक प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित करेगी। उनका कहना है कि विभिन्न विभागों में कार्यरत कर्मचारी यदि नवीन तकनीकों, प्रशासनिक प्रक्रियाओं और विशेषज्ञता आधारित पाठ्यक्रमों का अध्ययन करेंगे तो उनकी कार्यकुशलता और पेशेवर दक्षता में वृद्धि होगी। इससे विभागीय कार्यों के निष्पादन में सुधार आने के साथ-साथ जनसेवाओं की गुणवत्ता भी बेहतर हो सकती है। सरकार का मानना है कि प्रशिक्षित और दक्ष मानव संसाधन प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

शपथ-पत्र देना होगा अनिवार्य

इस सुविधा का लाभ प्राप्त करने के लिए कर्मचारियों को शपथ-पत्र प्रस्तुत करना होगा। इसमें यह घोषणा करनी होगी कि अध्ययन अवधि के दौरान वे किसी प्रकार की छात्रवृत्ति, स्टाइपेंड अथवा अंशकालिक रोजगार से आर्थिक लाभ प्राप्त नहीं कर रहे हैं। सरकार ने यह प्रावधान इसलिए रखा है ताकि अध्ययन अवकाश के दौरान वेतन संबंधी सुविधा का लाभ निर्धारित नियमों के अनुसार ही दिया जा सके। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार इससे पहले प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों में उच्च एवं विशेषज्ञता पाठ्यक्रम कर रहे एलोपैथिक चिकित्सकों के लिए भी अध्ययन अवकाश के दौरान पूर्ण वेतन की सुविधा बहाल कर चुकी है। अब इसी प्रकार की व्यवस्था अन्य पात्र कर्मचारियों पर भी लागू की गई है।

कर्मचारी कल्याण पर सरकार का जोर

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार कर्मचारियों के कल्याण और पेशेवर विकास के लिए विभिन्न कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को उच्च शिक्षा और प्रशिक्षण के अवसर उपलब्ध कराना प्रशासनिक क्षमता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। मुख्यमंत्री के अनुसार अध्ययन अवकाश के दौरान पूर्ण वेतन की सुविधा कर्मचारियों को अपनी योग्यता और कौशल बढ़ाने का अवसर प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित और बेहतर दक्षता वाले कर्मचारी सरकारी सेवाओं के संचालन में अधिक प्रभावी योगदान दे सकते हैं, जिससे विभागीय कार्यप्रणाली और सेवा वितरण व्यवस्था को भी लाभ मिलेगा।

Related Topics: