हिमाचल में फायर सीजन के दौरान 133 वनाग्नि घटनाएं दर्ज, 2396 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित
हिमाचल प्रदेश में फायर सीजन के दौरान अब तक 133 वनाग्नि की घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिनसे 2396.16 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ है। वन विभाग ने विभिन्न सर्किलों की संवेदनशील बीटों में निगरानी बढ़ाने और फायर लाइन साफ रखने के निर्देश जारी किए हैं।
शिमला
फायर सीजन में 133 वनाग्नि की घटनाएं दर्ज
हिमाचल प्रदेश में जारी फायर सीजन के दौरान अब तक 133 वनाग्नि की घटनाएं दर्ज की गई हैं। वन विभाग की ताजा फॉरेस्ट फायर रिपोर्ट के अनुसार इन घटनाओं में कुल 2396.16 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ है। विभागीय आंकड़ों में बताया गया है कि प्रभावित क्षेत्रों में प्राकृतिक वन क्षेत्र के साथ-साथ पौधारोपण वाले क्षेत्र भी शामिल हैं। आग की घटनाओं के कारण 126.91 हेक्टेयर में किए गए पौधारोपण को भी नुकसान पहुंचा है। विभाग ने रिपोर्ट में कहा है कि बढ़ते तापमान और सूखे मौसम को देखते हुए संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी और गश्त बढ़ा दी गई है।वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार इस बार कई सर्किलों में आग की घटनाएं अलग-अलग समय पर सामने आई हैं। विभाग ने सभी फील्ड अधिकारियों और कर्मचारियों को फायर लाइन साफ रखने, संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित निरीक्षण करने और किसी भी आग की सूचना मिलने पर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों से भी आग की रोकथाम में सहयोग करने की अपील की है।
मंडी सर्किल में सबसे अधिक आग की घटनाएं
फॉरेस्ट फायर रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में सबसे अधिक 47 वनाग्नि की घटनाएं मंडी सर्किल में दर्ज की गई हैं। इन घटनाओं में 259.2 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ है। विभाग ने मंडी सर्किल के कई इलाकों को अत्यधिक संवेदनशील श्रेणी में रखा है और यहां अतिरिक्त निगरानी व्यवस्था लागू की गई है।वहीं शिमला सर्किल में आग की घटनाओं की संख्या अन्य क्षेत्रों की तुलना में कम रही, लेकिन यहां सबसे अधिक 1544.36 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार इस प्रभावित क्षेत्र में 1512.65 हेक्टेयर प्राकृतिक वन क्षेत्र शामिल है। विभाग का कहना है कि पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में आग पर नियंत्रण और निगरानी कार्य चुनौतीपूर्ण रहता है, जिसके चलते कई इलाकों में बड़े क्षेत्र प्रभावित हुए हैं।
धर्मशाला, नाहन और अन्य सर्किलों की स्थिति
धर्मशाला सर्किल में अब तक 26 आग की घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिनसे 82.7 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ है। नाहन सर्किल में 27 घटनाओं के दौरान 346.8 हेक्टेयर क्षेत्र आग की चपेट में आया। हमीरपुर सर्किल में सात घटनाओं में 24.8 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुआ, जबकि सोलन सर्किल में चार घटनाओं के कारण 34.3 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ है।इसके अतिरिक्त बिलासपुर सर्किल में आग की चार घटनाओं के दौरान 12 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुआ। चंबा सर्किल और ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क कुल्लू में दो-दो घटनाओं में क्रमशः 12.5 और 21 हेक्टेयर क्षेत्र आग की चपेट में आया है। रामपुर सर्किल में इस वर्ष फायर सीजन के दौरान एक घटना दर्ज की गई, जिसमें 4.5 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ।
विभिन्न सर्किलों की संवेदनशील बीटों पर विभाग की निगरानी
वन विभाग ने कई बीटों को अति संवेदनशील घोषित करते हुए वहां विशेष निगरानी शुरू की है। बिलासपुर सर्किल में गांधी, छबोला, गोचर, समोह, बंदलाधारपुर, जमथल, कुड्डी, जनदौर, गरामोरा, स्वाहण, बानेर, जगातखाना, स्वारघाट, बैहनहट्टी और कुठार बीटों को संवेदनशील माना गया है। चंबा सर्किल में सरोली, कियान, गोला, हटाली, ककरोटी, तुंडी, मन्होटा, चुवाड़ी, ममूल, कटरोह, तुनुहट्टी, सुर्खीगला, शेरपुर, नगाली और बनीखेत क्षेत्र की बीटों को हाई अलर्ट श्रेणी में रखा गया है।धर्मशाला सर्किल के अंतर्गत कांगड़ा, पालमपुर, बैजनाथ, नूरपुर और जवाली क्षेत्र की कई बीटों को आग की दृष्टि से संवेदनशील माना गया है। इनमें घीन, जस्सई, नंदरोल, मुंडला, दालटपुर, रजियाणा, घुरकरी, रेहलू, बस्सा, लूणी, कोटा, मल्लां, पठियार, थुरल, हरसी, खैरा, बैजनाथ, चौबीन, गोपालपुर, मंगवाल और जवाली क्षेत्र शामिल हैं। विभाग ने इन क्षेत्रों में नियमित गश्त और निगरानी के निर्देश जारी किए हैं।
मंडी, कुल्लू, नाहन और सोलन में विशेष सतर्कता
मंडी जिला के बग्गी, सुंदरनगर, गोहर, सरकाघाट, जोगिंद्रनगर, चौंतड़ा, उरला, धर्मपुर और कमलाह क्षेत्र की बीटों को भी अति संवेदनशील सूची में शामिल किया गया है। कुल्लू सर्किल में भुंर, गड़सा, जरी, कसावरी, माशगण, खोखन और दुगीलग क्षेत्र की बीटों पर विभाग विशेष निगरानी बनाए हुए है।नाहन सर्किल में पांवटा, जमटा, बनेठी, त्रिलोकपुर, कोटला, शंभलका और कफोटा क्षेत्र की बीटों को संवेदनशील सूची में रखा गया है। वहीं सोलन सर्किल में बद्दी, धर्मपुर, नालागढ़, रामशहर और साई बीट को आग की दृष्टि से अधिक संवेदनशील माना गया है।
शिमला सर्किल में सबसे अधिक क्षेत्र प्रभावित
शिमला सर्किल इस फायर सीजन में सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल रहा है। विभाग ने मशोबरा, शोघी, कुफरी, तारा देवी, ठियोग, मटियाना, बलसन, कोटखाई, रोहड़ू, जुब्बड़हट्टी, चौपाल और नेरवा क्षेत्र की बीटों को अति संवेदनशील घोषित किया है। इन क्षेत्रों में फील्ड स्टाफ को लगातार निगरानी बनाए रखने और किसी भी आग की सूचना पर तुरंत प्रतिक्रिया देने के निर्देश दिए गए हैं।प्रिंसीपल चीफ कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट डॉ. संजय सूद ने कहा कि विभाग ने सभी संवेदनशील क्षेत्रों में गश्त बढ़ाने, फायर लाइन साफ रखने और फायर कंट्रोल व्यवस्था को सक्रिय रखने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने लोगों से जंगलों में आग न जलाने, बीड़ी-सिगरेट के टुकड़े न फेंकने और किसी भी आग की सूचना तुरंत वन विभाग या प्रशासन को देने की अपील की है ताकि वन क्षेत्र को नुकसान से बचाया जा सके।