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एईडीपी विद्यार्थियों को उद्योग का अनुभव और रोजगार के नए अवसर प्रदान करेंगे : शिक्षा मंत्री

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन • 3 Hours Ago • 1 Min Read

Himachal Government: प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से 16 राजकीय महाविद्यालयों में अप्रेंटिसशिप एम्बेडेड डिग्री प्रोग्राम लागू करने के लिए बोर्ड ऑफ अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग, उत्तरी क्षेत्र, कानपुर के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर की उपस्थिति में बीओएटी-एनआर के निदेशक विवेक कुमार और संबंधित महाविद्यालयों के प्रधानाचार्यों ने समझौते पर हस्ताक्षर किए। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को स्नातक डिग्री के साथ उद्योग में व्यावहारिक अनुभव और रोजगार से जुड़े कौशल प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।

हिमाचल प्रदेश

शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य कक्षा में दी जाने वाली शिक्षा और उद्योग की जरूरतों के बीच अंतर कम करना है। एईडीपी के तहत विद्यार्थियों को मान्यता प्राप्त स्नातक डिग्री के साथ वास्तविक कार्यस्थल पर व्यावहारिक अनुभव भी दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार कौशल आधारित शिक्षा को प्रोत्साहित करने और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने पर विशेष ध्यान दे रही है। बीओएटी-एनआर के साथ हुआ समझौता उद्योगों से संबंध मजबूत करने और विद्यार्थियों के लिए अप्रेंटिसशिप उपलब्ध करवाने में मदद करेगा।

छह महीने की अप्रेंटिसशिप और मासिक स्टाइपेंड

एईडीपी में बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं एवं बीमा, लॉजिस्टिक्स और रिटेल ऑपरेशंस मैनेजमेंट जैसे उद्योग-केंद्रित डिग्री कार्यक्रम शामिल हैं। शैक्षणिक अध्ययन के साथ विद्यार्थियों के लिए उद्योग में कम से कम छह महीने की अनिवार्य अप्रेंटिसशिप होगी। इस अवधि में उन्हें प्रति माह न्यूनतम 10,900 रुपये का सुनिश्चित स्टाइपेंड दिया जाएगा। शिक्षा मंत्री के अनुसार, इससे विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान कार्यस्थल का अनुभव मिलेगा और वे उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल विकसित कर सकेंगे।

एईडीपी के अंतर्गत पांच पाठ्यक्रम लागू करने की मंजूरी दी गई है। पहले चरण में 16 राजकीय महाविद्यालयों में बी.कॉम. बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं एवं बीमा, बी.कॉम. रिटेल ऑपरेशंस मैनेजमेंट और बी.कॉम. लॉजिस्टिक्स कार्यक्रम शुरू किए गए हैं। बी.कॉम. बीएफएसआई का संचालन 11 महाविद्यालयों, रिटेल ऑपरेशंस मैनेजमेंट का दो महाविद्यालयों और लॉजिस्टिक्स का तीन महाविद्यालयों में किया जा रहा है। तीनों कार्यक्रमों में कुल 685 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है और आने वाले वर्षों में अधिक विद्यार्थियों को इनसे जोड़ने की योजना है।

ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को लाभ

शिक्षा मंत्री ने कहा कि यह कार्यक्रम विशेष रूप से ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के विद्यार्थियों के लिए उपयोगी होगा। उन्हें कार्यस्थल का अनुभव, उद्योग से संबंधित कौशल और बेहतर रोजगार की संभावनाएं मिलेंगी। कार्यक्रम को उद्योगों से संपर्क, अप्रेंटिसशिप, प्रशिक्षण और प्लेसमेंट सहायता के लिए महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों, बीओएटी-एनआर और सीआरआईएसपी के सहयोग से संचालित किया जा रहा है। हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के बाद इस तरह के अप्रेंटिसशिप आधारित डिग्री कार्यक्रम लागू करने वाला देश का तीसरा राज्य है।

रोहित ठाकुर ने कहा कि विद्यार्थियों की प्रतिक्रिया को देखते हुए भविष्य में एईडीपी का विस्तार अधिक महाविद्यालयों तक किया जाएगा। बी.ए. और बी.एससी. जैसे अन्य स्नातक पाठ्यक्रमों में भी अप्रेंटिसशिप आधारित कार्यक्रम शुरू करने की संभावनाओं का अध्ययन किया जाएगा। राज्य के 21 राजकीय महाविद्यालयों में रिटेल मैनेजमेंट तथा टूरिज्म एंड हॉस्पिटैलिटी के बी.वोक. कार्यक्रम पहले से चल रहे हैं। बेहतर प्लेसमेंट परिणामों के आधार पर सरकार ने इनका विस्तार 25 अन्य महाविद्यालयों तक करने का निर्णय लिया है।

शिक्षा सचिव राकेश कंवर ने कहा कि समझौता ज्ञापन विद्यार्थियों को व्यावहारिक अनुभव, उद्योग-केंद्रित कौशल और रोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उनके अनुसार, राज्य सरकार शिक्षा क्षेत्र में गुणात्मक सुधार और विद्यार्थियों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने के लिए कदम उठा रही है। कार्यक्रम में शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, विभिन्न महाविद्यालयों के प्रधानाचार्य और बीओएटी-एनआर के पदाधिकारी भी उपस्थित रहे।

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