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हिमाचल के सरकारी स्कूलों में प्री-प्राइमरी शिक्षकों की कमी, शिक्षकों ने खुद की व्यवस्था की, भर्तियों के मामले में शिक्षा उपनिदेशक से रिपोर्ट मांगी जाएगी

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन II • 41 Mins Ago • 1 Min Read

हिमाचल प्रदेश के सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में प्री-प्राइमरी शिक्षकों की नियुक्ति नहीं होने के कारण नियमित शिक्षक अतिरिक्त जिम्मेदारी निभा रहे हैं। ऊना जिले के कई स्कूलों में शिक्षकों ने अपने स्तर पर प्री-प्राइमरी कक्षाओं के संचालन के लिए स्थानीय शिक्षकों की व्यवस्था की है, ताकि इन कक्षाओं का कामकाज प्रभावित न हो।

ऊना

प्री-प्राइमरी कक्षाओं की जिम्मेदारी नियमित शिक्षकों पर

हिमाचल प्रदेश के सरकारी प्राथमिक स्कूलों में प्री-प्राइमरी कक्षाओं के लिए अलग से शिक्षकों की नियुक्ति नहीं होने के कारण इन कक्षाओं का दायित्व भी नियमित प्राथमिक शिक्षकों को सौंपा गया है। अतिरिक्त जिम्मेदारी के चलते कई शिक्षकों ने अपने स्तर पर प्री-प्राइमरी कक्षाओं के संचालन के लिए स्थानीय स्तर पर शिक्षकों की व्यवस्था की है। इन शिक्षकों को नियमित शिक्षक अपनी ओर से 2500 से 3000 रुपये प्रतिमाह मानदेय दे रहे हैं। प्राथमिक शिक्षक संघ ऊना का दावा है कि जिले में ऐसे लगभग 400 प्री-प्राइमरी शिक्षकों को नियमित शिक्षक स्वयं मानदेय दे रहे हैं।

ऊना के पांचों शिक्षा खंडों में अपनाई गई व्यवस्था

प्राथमिक शिक्षक संघ के अनुसार ऊना जिले के पांचों शिक्षा खंडों के अधिकांश सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में प्री-प्राइमरी कक्षाओं का संचालन इसी व्यवस्था के माध्यम से किया जा रहा है। संघ का कहना है कि प्रदेश सरकार ने प्री-प्राइमरी कक्षाएं तो शुरू कर दीं, लेकिन इनके लिए अलग से शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की गई। इसके चलते पहली से पांचवीं कक्षा तक पढ़ाने वाले शिक्षकों को प्री-प्राइमरी बच्चों की जिम्मेदारी भी निभानी पड़ रही है। संघ के अनुसार जिले के 50 सरकारी स्कूलों में प्री-प्राइमरी कक्षाएं संचालित हो रही हैं, जबकि पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध नहीं है।

गतिविधि आधारित शिक्षा के लिए अलग शिक्षक की आवश्यकता

शिक्षकों का कहना है कि तीन से छह वर्ष तक के बच्चों को गतिविधि आधारित शिक्षा, व्यक्तिगत देखभाल और अधिक समय की आवश्यकता होती है। अन्य कक्षाओं के साथ इस आयु वर्ग के बच्चों को पढ़ाना व्यावहारिक रूप से चुनौतीपूर्ण है। इसी कारण शिक्षकों ने आपसी सहयोग से स्थानीय स्तर पर युवतियों को प्री-प्राइमरी कक्षाओं के संचालन के लिए रखा है। उनका कहना है कि यदि यह व्यवस्था नहीं की जाती तो प्री-प्राइमरी कक्षाओं का संचालन प्रभावित हो सकता था और अभिभावक बच्चों का प्रवेश निजी विद्यालयों में कराने का विकल्प चुन सकते थे। शिक्षकों के अनुसार इस स्तर की शिक्षा के लिए अलग व्यवस्था और नियमित मानव संसाधन की आवश्यकता है।

शिक्षकों ने नियमित नियुक्तियों की मांग की

प्राथमिक शिक्षक कुलदीप कंग, राकेश चंद्र शर्मा, राजकुमार, शिव कुमार, वीरेंद्र राणा, शोभा गुलेरिया, पूजा कंवर और दर्शन शर्मा ने कहा कि यह व्यवस्था लंबे समय तक जारी रखना संभव नहीं है। उन्होंने सरकार से प्री-प्राइमरी शिक्षकों की नियमित नियुक्ति करने की मांग की है। उनके अनुसार जिले के प्राथमिक विद्यालयों में जेबीटी अध्यापकों के 100 से अधिक पद रिक्त हैं, जबकि प्री-प्राइमरी कक्षाओं के लिए लगभग 300 शिक्षकों की आवश्यकता है। शिक्षकों ने कहा कि जिले के 50 सरकारी स्कूलों में प्री-प्राइमरी कक्षाएं संचालित हो रही हैं, लेकिन पर्याप्त शिक्षकों की कमी के कारण संचालन और बच्चों की शुरुआती शिक्षा पर असर पड़ने की आशंका बनी हुई है।

संघ और शिक्षा विभाग का पक्ष

जिला प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष संदेश कुमार ने कहा कि संघ ने अपने स्तर पर प्री-प्राइमरी कक्षाओं के संचालन, बच्चों की शुरुआती शिक्षा और छात्र संख्या बनाए रखने के उद्देश्य से लगभग 400 शिक्षकों की व्यवस्था की है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में एसएमसी और शिक्षा विभाग की ओर से स्पष्ट निर्देश जारी नहीं किए गए हैं। जिला प्राथमिक शिक्षा उपनिदेशक सोमलाल धीमान ने कहा कि जिले के कई प्राथमिक विद्यालयों में प्री-प्राइमरी कक्षाओं के लिए स्थानीय स्तर पर शिक्षकों की व्यवस्था की गई है। उन्होंने बताया कि विभाग इस स्थिति से अवगत है, लेकिन इसका स्थायी समाधान नियमित नियुक्तियों के बाद ही संभव होगा। स्कूल शिक्षा निदेशक आशीष कोहली ने कहा कि शिक्षक अपने स्तर पर किसी भी प्रकार की नियुक्तियां करने के लिए अधिकृत नहीं हैं। उन्होंने बताया कि ऊना जिले में हुई इन नियुक्तियों के संबंध में शिक्षा उपनिदेशक से विस्तृत रिपोर्ट मांगी जाएगी।