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Monsoon / मानसून में फसल और पशुधन की सुरक्षा को लेकर कृषि वैज्ञानिकों की एडवाइजरी जारी, किसानों से बरतने को कहा विशेष सावधानी

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन II • 42 Mins Ago • 1 Min Read

Monsoon : मानसून के दौरान लगातार बारिश और बढ़ी नमी को देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों और पशुपालकों के लिए मौसम आधारित एडवाइजरी जारी की है। सलाह में फसलों की देखभाल, जल निकासी, कीट एवं रोग नियंत्रण के साथ पशुधन, मत्स्य पालन और खानपान संबंधी आवश्यक सावधानियां अपनाने का आग्रह किया गया है।

धौलाकुआं/नाहन

मानसून के दौरान लगातार बारिश और बढ़ी नमी को देखते हुए किसानों और पशुपालकों के लिए मौसम आधारित कृषि एवं पशुपालन सलाह जारी की गई है। कृषि विज्ञान केंद्र धौलाकुआं के प्रभारी एवं प्रधान वैज्ञानिक डॉ. पंकज मित्तल ने बताया कि चौधरी सरवन कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर के प्रसार शिक्षा निदेशालय ने जुलाई माह के दूसरे पखवाड़े के लिए यह एडवाइजरी जारी की है।

डॉ. मित्तल ने बताया कि धान की रोपाई करने वाले किसान खराब पौधों की समय पर भराई करें तथा खरपतवार नियंत्रण के लिए अनुशंसित उपाय अपनाएं। मक्की की 30 से 35 दिन की फसल में निराई-गुड़ाई के साथ यूरिया की टॉप ड्रेसिंग करें। वहीं माश, मूंग, कुल्थी और सोयाबीन की फसलों में जल निकासी की उचित व्यवस्था बनाए रखने और समय पर खरपतवार नियंत्रण करने की सलाह दी गई है।

उन्होंने बताया कि फूलगोभी, टमाटर, बैंगन, शिमला मिर्च, हरी मिर्च और कद्दूवर्गीय सब्जियों में पोषक तत्वों का संतुलित प्रयोग करने के साथ कीट एवं रोगों की नियमित निगरानी आवश्यक है। फल छेदक, फल मक्खी और अन्य कीटों के नियंत्रण के लिए अनुशंसित दवाओं एवं फेरोमोन ट्रैप के उपयोग की सलाह भी दी गई है।

पशुपालकों को भी दी गई अहम सलाह

डॉ. मित्तल ने कहा कि बरसात के मौसम में पशुओं में चिचड़, पिस्सू, मक्खी और मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है, जिससे कई संक्रामक रोग फैल सकते हैं। इसलिए पशुशालाओं की नियमित सफाई, कृमिनाशक दवाओं का प्रयोग, समय पर टीकाकरण और हरे व सूखे चारे का संतुलित मिश्रण देना जरूरी है। मुर्गीपालकों को सूखा एवं फफूंद रहित आहार सुरक्षित रखने तथा मत्स्य पालकों को तालाबों की जल निकासी और तटबंधों की नियमित देखभाल करने की सलाह दी गई है।

खानपान में भी बरतें सावधानी

उन्होंने बताया कि बरसात के मौसम में ताजा और आसानी से पचने वाला भोजन करें। उबला या फिल्टर किया हुआ पानी पिएं, बासी और तला-भुना भोजन खाने से बचें तथा फल और सब्जियों को अच्छी तरह धोकर ही उपयोग में लाएं।डॉ. पंकज मित्तल ने किसानों से अपील की कि वे अधिक जानकारी के लिए अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र, कृषि, उद्यान एवं पशुपालन विभाग के अधिकारियों से संपर्क करें। कृषि तकनीकी सूचना केंद्र (एटिक) पालमपुर के दूरभाष 01894-230395 पर भी विशेषज्ञों से परामर्श लिया जा सकता है।

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