मुख्यमंत्री ने हाइबिस्कस योजना शुरू की, जैव विविधता संरक्षण के लिए वन विभाग को मिले 2 करोड़ रुपये
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने राज्य में जैव विविधता संरक्षण और सतत आजीविका को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हाइबिस्कस योजना का शुभारंभ किया। योजना के क्रियान्वयन के लिए हिमाचल प्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड ने वन विभाग को दो करोड़ रुपये जारी किए हैं।
शिमला
हाइबिस्कस योजना का शुभारंभ
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने हिमाचल बायोडायवर्सिटी स्टेकहोल्डर-लेड कंजर्वेशन यूनिफाइड योजना (हाइबिस्कस) का शुभारंभ किया। यह योजना राज्य में जैव विविधता संरक्षण, पारिस्थितिकी तंत्र की पुनर्बहाली और जैविक संसाधनों के सतत उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई है। योजना के माध्यम से स्थानीय समुदायों की भागीदारी को केंद्र में रखते हुए संरक्षण कार्यों को आगे बढ़ाया जाएगा, ताकि पर्यावरणीय संतुलन के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के अवसर भी विकसित किए जा सकें।
वन विभाग को जारी किए गए दो करोड़ रुपये
योजना के राज्यव्यापी क्रियान्वयन के लिए हिमाचल प्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड ने वन विभाग को दो करोड़ रुपये की राशि जारी की है। इस धनराशि का उपयोग पौधारोपण, औषधीय पौधों के संरक्षण, नर्सरी विकास, क्षमता निर्माण और अन्य संबंधित गतिविधियों में किया जाएगा। योजना के तहत वन भूमि, सामुदायिक भूमि, निजी भूमि और कृषि भूमि पर भी कार्य किए जाएंगे, जिससे संरक्षण गतिविधियों का दायरा व्यापक होगा और विभिन्न क्षेत्रों में एक समान क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सकेगा।
किसानों और सामुदायिक समूहों को मिलेगा लाभ
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना से राज्य के लगभग दो लाख किसान और 10 हजार सामुदायिक समूह लाभान्वित होंगे। योजना को राज्य जैव विविधता बोर्ड, औद्योगिक साझेदारों और किसानों की सहभागिता पर आधारित लागत-साझेदारी मॉडल के तहत लागू किया जाएगा। इसके माध्यम से औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती, बाजार से जुड़ी गतिविधियों और जैव विविधता आधारित आजीविका के अवसरों को प्रोत्साहन मिलेगा। सरकार का लक्ष्य है कि संरक्षण कार्यों के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी इससे लाभ मिले।
डिजिटल निगरानी और पारदर्शी क्रियान्वयन
योजना के प्रभावी संचालन के लिए जियो-टैग्ड फोटो, मैदानी निरीक्षण और ऑनलाइन डैशबोर्ड के माध्यम से निगरानी की जाएगी। इससे कार्यों की प्रगति का नियमित आकलन किया जा सकेगा और विभिन्न स्तरों पर पारदर्शिता बनी रहेगी। योजना के तहत किए जाने वाले कार्यों की रिपोर्टिंग और समीक्षा डिजिटल माध्यमों से की जाएगी, ताकि राज्यभर में क्रियान्वयन की स्थिति पर समय-समय पर नजर रखी जा सके।
औषधीय पौधों और जैव विविधता आधारित विकास पर रहेगा फोकस
यह योजना राजीव गांधी वन संवर्धन योजना के ढांचे पर आधारित है। इसके अंतर्गत जैव विविधता प्रबंधन समितियों को सशक्त बनाना, प्राथमिकता प्राप्त औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देना, प्राकृतिक आवासों की गुणवत्ता में सुधार करना, नर्सरी विकसित करना, पौधारोपण करना और क्षमता निर्माण जैसे कार्य शामिल हैं। योजना में लाभों के समान और न्यायसंगत वितरण पर भी जोर दिया गया है, ताकि संरक्षण गतिविधियों का लाभ समुदायों तक व्यवस्थित रूप से पहुंच सके। इस अवसर पर प्रधान सचिव तकनीकी शिक्षा डॉ. अभिषेक जैन, सचिव पर्यावरण, विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं जलवायु परिवर्तन सुशील कुमार सिंगला, निदेशक पर्यावरण, विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं जलवायु परिवर्तन तथा सदस्य सचिव, हिमाचल प्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड पुष्पेन्द्र राणा, संयुक्त सदस्य सचिव डॉ. सुरेश सी. अत्री तथा वन विभाग और हिमाचल प्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।