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हिमाचल हाईकोर्ट ने जेबीटी से टीजीटी हिंदी पदोन्नति पर लगाई रोक, सरकार से मांगा जवाब

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन II • 21 Jun 2026 • 1 Min Read

प्रदेश हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग में जेबीटी शिक्षकों को भाषा शिक्षक/टीजीटी हिंदी पदों पर दी गई पदोन्नति पर अंतरिम रोक लगाते हुए राज्य सरकार और संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए हैं। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई अगस्त में निर्धारित की है तथा सरकार को निर्धारित अवधि में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

शिमला

हाईकोर्ट का अंतरिम आदेश

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग में कार्यरत जेबीटी शिक्षकों को भाषा शिक्षक (टीजीटी हिंदी) पद पर दी गई पदोन्नति से जुड़े मामले में अंतरिम आदेश जारी किया है। न्यायमूर्ति अजय मोहन गोयल की अदालत ने कहा कि यदि वर्तमान परिस्थितियों में पदोन्नति प्रक्रिया को जारी रहने दिया जाता है तो इससे विवादित प्रशासनिक कार्रवाई को वैधता मिलने की स्थिति बन सकती है। अदालत ने मामले से जुड़े सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए राज्य सरकार को अपना पक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर उठे प्रश्न

अदालत के समक्ष प्रस्तुत तथ्यों के अनुसार शिक्षा विभाग ने जेबीटी शिक्षकों को भाषा शिक्षक पदों पर पदोन्नत करने के लिए विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) का गठन किया था। स्कूल शिक्षा निदेशालय की ओर से संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए थे कि केवल उन जेबीटी शिक्षकों के मामलों पर विचार किया जाए जो वर्ष 2009 के भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के तहत निर्धारित योग्यता और सेवा अवधि पूरी करते हों। इसके बाद 31 मार्च 2026 को पदोन्नति आदेश जारी किए गए थे।

नए भर्ती एवं पदोन्नति नियम बने विवाद का आधार

याचिका में तर्क दिया गया कि राज्य सरकार ने 18 फरवरी 2025 को टीजीटी हिंदी पदों के लिए नए भर्ती एवं पदोन्नति नियम अधिसूचित किए थे, जिन्हें 22 फरवरी 2025 को राजपत्र में प्रकाशित किया गया। याचिकाकर्ता पक्ष का कहना है कि नए नियम लागू होने के बाद वर्ष 2009 के पुराने नियम प्रभावहीन हो गए थे। ऐसे में 18 फरवरी 2025 के बाद आयोजित किसी भी विभागीय पदोन्नति समिति को नए नियमों के अनुरूप ही पदोन्नति प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए थी। इसी आधार पर पदोन्नति आदेशों को चुनौती दी गई है।

अगली सुनवाई अगस्त में

हाईकोर्ट ने मामले में राज्य सरकार सहित संबंधित पक्षों से जवाब तलब किया है। अदालत ने सरकार को 5 अगस्त तक अपना जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं, जबकि मामले की अगली सुनवाई 7 अगस्त 2026 को निर्धारित की गई है। मामले के अंतिम निर्णय तक पदोन्नति प्रक्रिया पर अंतरिम रोक प्रभावी रहेगी।

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