हिमाचल हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, कर्मचारियों के पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभों में जुड़ेगी अनुबंध अवधि
Himachalnow / शिमला
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों की अनुबंध अवधि को पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभों में जोड़ने को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। अदालत ने सरकारी कर्मचारी (भर्ती एवं सेवा शर्तें) अधिनियम 2024 को असांविधानिक करार देते हुए इससे जुड़े आदेश और रिकवरी नोटिस निरस्त कर दिए हैं।
शिमला
हाईकोर्ट ने अधिनियम 2024 को किया निरस्त
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों की सेवा शर्तों और पेंशन लाभों से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण आदेश जारी किए हैं। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने देविंद्र कुमार बनाम हिमाचल राज्य मामले की सुनवाई करते हुए सरकारी कर्मचारी (भर्ती एवं सेवा शर्तें) अधिनियम 2024 को असांविधानिक करार देते हुए निरस्त कर दिया। अदालत ने कहा कि इस अधिनियम के माध्यम से कर्मचारियों के सेवा लाभों को सीमित करना या उनकी सेवा शर्तों में प्रतिकूल बदलाव करना कानूनन उचित नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने उक्त अधिनियम के आधार पर जारी सभी आदेश, निर्देश और रिकवरी नोटिस तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिए हैं।
अनुबंध अवधि को पेंशन लाभों में जोड़ा जाएगा
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि जो कर्मचारी पहले अनुबंध आधार पर नियुक्त हुए थे और बाद में नियमित किए गए, उनकी अनुबंध सेवा अवधि को पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों की गणना में शामिल किया जाएगा। इसके साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि अनुबंध सेवा के दौरान मिलने वाली वार्षिक वेतन वृद्धि को केवल अंतिम वेतन और सेवानिवृत्ति लाभ निर्धारित करने के लिए नोशनल आधार पर जोड़ा जाएगा। हालांकि इस अवधि के एरियर का भुगतान नहीं किया जाएगा।
वरिष्ठता और वित्तीय लाभों को लेकर भी निर्देश
खंडपीठ ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी कर्मचारी की नियुक्ति आरएंडपी नियमों या बैचवाइज प्रक्रिया के तहत हुई है, तो उसे पहली नियुक्ति की तारीख से वरिष्ठता और संबंधित वित्तीय लाभ दिए जाएंगे। अदालत ने यह भी कहा कि पेंशन जैसे आवर्ती लाभों के मामलों में यदि याचिका दायर करने में देरी हुई है, तो वित्तीय लाभ दावा दाखिल करने की तारीख से तीन वर्ष पूर्व तक सीमित किए जा सकते हैं।अदालत ने याचिकाकर्ता दलीप सिंह को 30 मई 2026 तक सक्षम प्राधिकारी के समक्ष अपना प्रतिनिधित्व प्रस्तुत करने की अनुमति दी है। साथ ही राज्य सरकार को निर्देश दिए गए हैं कि 30 जून 2026 तक संबंधित कर्मचारी की सुनवाई कर सकारण आदेश पारित किया जाए। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन कर्मचारियों के पक्ष में पहले ही न्यायालय के निर्णय आ चुके हैं, उन्हें अगले तीन महीनों के भीतर सभी लाभ सुनिश्चित किए जाएं।
सहायक अभियंता पदोन्नति प्रक्रिया पर भी रोक
हाईकोर्ट ने एक अन्य मामले में सहायक अभियंता पदों पर 29 प्रतिशत कोटे के तहत की जाने वाली पदोन्नति प्रक्रिया से जुड़े संशोधन पर भी अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने 11 फरवरी 2026 को जारी संशोधित अधिसूचना के क्रियान्वयन पर अगली सुनवाई तक रोक लगाने के आदेश दिए हैं। खंडपीठ ने राज्य सरकार को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।याचिकाकर्त्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि 29 प्रतिशत कोटे के तहत पदोन्नति के लिए विचाराधीन जूनियर कर्मचारी इस मामले में आवश्यक पक्षकार हैं। अदालत ने इस दलील को स्वीकार करते हुए 22 अन्य कर्मचारियों को मामले में शामिल करने की अनुमति दी है। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार चाहे तो संशोधन से पहले लागू नियमों के अनुसार पदोन्नति प्रक्रिया जारी रख सकती है। मामले की अगली सुनवाई 15 जून को निर्धारित की गई है।