50 वर्ष से अधिक पुराने पुलों की होगी सुरक्षा जांच, सरकार ने मांगी विस्तृत रिपोर्ट
प्रदेश सरकार ने 50 वर्ष या उससे अधिक पुराने पुलों की सुरक्षा, संरचनात्मक स्थिति और उपयोगिता का आकलन करने के लिए विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। लोक निर्माण विभाग के विभिन्न जोनों से प्राप्त जानकारी के आधार पर यह तय किया जाएगा कि किन पुलों की मरम्मत, सुदृढ़ीकरण या पुनर्निर्माण की आवश्यकता है और आगे की कार्ययोजना किस तरह तैयार की जाए।
शिमला
पुराने पुलों के सुरक्षा आकलन की प्रक्रिया शुरू
हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य में 50 वर्ष या उससे अधिक पुराने पुलों की सुरक्षा, मजबूती और संरचनात्मक स्थिति का आकलन करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। लोक निर्माण विभाग के चारों जोनों के मुख्य अभियंताओं को अपने-अपने क्षेत्रों में स्थित ऐसे पुलों की पहचान कर उनकी विस्तृत जानकारी उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार ने यह प्रक्रिया पुराने पुलों की वर्तमान स्थिति का तकनीकी मूल्यांकन करने और आगे की कार्ययोजना तय करने के लिए शुरू की है।
मुख्य अभियंताओं से मांगी गई विस्तृत रिपोर्ट
सरकार द्वारा मांगी गई रिपोर्ट में पुलों की आयु, निर्माण वर्ष, वर्तमान तकनीकी स्थिति, मरम्मत की आवश्यकता, भार वहन क्षमता, संरचनात्मक मजबूती और भविष्य में उनकी उपयोगिता से संबंधित जानकारी शामिल करने को कहा गया है। प्रत्येक पुल की अलग-अलग समीक्षा की जाएगी और रिपोर्ट के आधार पर यह तय किया जाएगा कि कौन से पुल मरम्मत योग्य हैं और किन पुलों के लिए पुनर्निर्माण की आवश्यकता है। विभागीय स्तर पर यह रिपोर्ट आगे की तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रिया का आधार बनेगी।
यातायात दबाव को ध्यान में रखकर होगी समीक्षा
विभागीय अधिकारियों के अनुसार प्रदेश में कई पुल ऐसे हैं जिनका निर्माण कई दशक पहले हुआ था। उस समय की तुलना में वर्तमान में वाहनों की संख्या और यातायात का दबाव काफी बढ़ गया है। इसी कारण पुराने पुलों की मौजूदा क्षमता, उपयोगिता और सुरक्षा मानकों के अनुरूप उनकी स्थिति की समीक्षा की जा रही है। तकनीकी परीक्षण के दौरान यह भी देखा जाएगा कि बढ़े हुए यातायात भार को वे पुल वर्तमान स्थिति में संभालने में सक्षम हैं या नहीं।
मरम्मत और पुनर्निर्माण पर लिया जाएगा निर्णय
रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद पुलों की स्थिति के आधार पर आगे का निर्णय लिया जाएगा। जिन पुलों की मरम्मत, सुदृढ़ीकरण या तकनीकी सुधार से उपयोगिता बनाए रखी जा सकती है, उनके लिए अलग कार्ययोजना तैयार की जाएगी। जिन पुलों को अनुपयुक्त, कमजोर या जोखिमपूर्ण पाया जाएगा, उनके स्थान पर नए पुलों के निर्माण की योजना बनाई जाएगी। आवश्यक परियोजनाओं को तकनीकी प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जाएगा।
केंद्र सरकार से भी लिया जा सकता है सहयोग
यदि किसी पुल को संरचनात्मक रूप से पुनर्निर्माण योग्य पाया जाता है, तो उसके स्थान पर नए पुल के निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। ऐसे मामलों में संबंधित परियोजनाओं के लिए आवश्यकता अनुसार केंद्र सरकार से सहयोग लेने पर भी विचार किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य पुराने पुलों की स्थिति का वैज्ञानिक आकलन कर समय रहते आवश्यक कदम उठाना है, ताकि परिवहन व्यवस्था को सुरक्षित और सुचारू बनाए रखा जा सके।