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27 जून से पंचायत प्रधानों को मिलेंगी वित्तीय शक्तियां, प्रदेशभर में शुरू होंगी आधिकारिक पंचायत बैठकें

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन II • 19 Jun 2026 • 1 Min Read

हिमाचल प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों में 27 जून को पहली आधिकारिक बैठक आयोजित की जाएगी। इसके साथ ही नवनिर्वाचित पंचायत प्रधान और उपप्रधान वित्तीय शक्तियों का उपयोग करने के पात्र हो जाएंगे तथा पंचायत स्तर के विभिन्न प्रशासनिक एवं विकास कार्यों की औपचारिक शुरुआत होगी।

शिमला

27 जून को होगी पहली आधिकारिक बैठक

हिमाचल प्रदेश में हाल ही में संपन्न पंचायतीराज चुनावों के बाद प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों में 27 जून को पहली आधिकारिक बैठक आयोजित की जाएगी। हिमाचल प्रदेश पंचायतीराज अधिनियम-1994 के प्रावधानों के अनुसार पंचायत प्रधान और उपप्रधान का कार्यकाल चुनाव परिणाम घोषित होने के साथ नहीं, बल्कि पहली आधिकारिक बैठक के आयोजन के बाद प्रभावी माना जाता है। इस बैठक में पंचायत के निर्वाचित वार्ड सदस्यों को शपथ दिलाई जाएगी तथा पंचायत की प्रशासनिक और विकासात्मक कार्यप्रणाली औपचारिक रूप से शुरू होगी। प्रदेश की 3,754 ग्राम पंचायतों में यह प्रक्रिया एक साथ पूरी की जाएगी, जिसके बाद नवगठित पंचायतें नियमित कार्यों का संचालन शुरू कर सकेंगी।

प्रधान और उपप्रधानों को मिलेंगी वित्तीय शक्तियां

पहली बैठक के साथ ही प्रदेशभर के 7,508 नवनिर्वाचित पंचायत प्रधान और उपप्रधान वित्तीय शक्तियों का उपयोग करने के पात्र हो जाएंगे। इसके साथ पंचायतों की आधिकारिक मोहर और वित्तीय दस्तावेजों पर हस्ताक्षर संबंधी अधिकार भी उनके पास आ जाएंगे। वित्तीय अधिकार मिलने के बाद पंचायतें विभिन्न योजनाओं से जुड़े भुगतान, प्रशासनिक स्वीकृतियां, विकास कार्यों के प्रस्ताव और पंचायत निधियों के उपयोग से संबंधित निर्णय नियमानुसार ले सकेंगी। इससे पंचायत स्तर पर लंबित प्रशासनिक प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाने में सुविधा होगी।

विकास कार्यों को मिलेगी प्रशासनिक स्वीकृति

वित्तीय शक्तियां प्रभावी होने के बाद पंचायतें ग्रामीण विकास से जुड़े विभिन्न कार्यों को गति दे सकेंगी। मनरेगा के तहत मजदूरी भुगतान और विकास कार्यों की स्वीकृति, ग्रामीण पेयजल योजनाओं का रखरखाव, संपर्क मार्गों की मरम्मत, सामुदायिक भवनों के निर्माण एवं रखरखाव, स्वच्छता कार्यक्रमों तथा अन्य पंचायत स्तरीय योजनाओं से संबंधित प्रस्तावों पर कार्रवाई की जा सकेगी। पंचायतों को मिलने वाले विभिन्न सरकारी अनुदानों और विकास निधियों के उपयोग की प्रक्रिया भी पहली बैठक के बाद नियमित रूप से संचालित होगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में चल रही योजनाओं के क्रियान्वयन में प्रशासनिक स्पष्टता आएगी।

31 हजार से अधिक जनप्रतिनिधि मानदेय के होंगे पात्र

27 जून को होने वाली पहली बैठक का महत्व केवल वित्तीय अधिकारों तक सीमित नहीं है। इसी दिन से प्रदेश के 31,182 नवनिर्वाचित पंचायतीराज जनप्रतिनिधि मानदेय प्राप्त करने के पात्र भी बन जाएंगे। इनमें पंचायत प्रधान, उपप्रधान, वार्ड सदस्य, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य शामिल हैं। पंचायतीराज व्यवस्था के तहत ये जनप्रतिनिधि स्थानीय स्तर पर विकास योजनाओं की निगरानी, जनसमस्याओं के समाधान और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पहली बैठक के बाद इनके अधिकार, दायित्व और प्रशासनिक जिम्मेदारियां औपचारिक रूप से प्रभावी हो जाएंगी।

अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार होगी कार्यवाही

पंचायतीराज अधिनियम के तहत पहली बैठक पंचायत प्रशासन की औपचारिक शुरुआत मानी जाती है। निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार प्रधान पंचायत की बैठकों की अध्यक्षता करेंगे और वित्तीय कार्यों सहित अन्य अधिकृत प्रशासनिक प्रक्रियाओं के लिए पंचायत की आधिकारिक मोहर का उपयोग कर सकेंगे। पंचायत स्तर पर लिए जाने वाले निर्णयों, विकास कार्यों की स्वीकृति, भुगतान संबंधी प्रक्रियाओं और विभिन्न सरकारी योजनाओं के संचालन में भी इसी बैठक के बाद नियमित कार्यवाही शुरू होगी। प्रशासनिक दृष्टि से यह बैठक नवगठित पंचायतों के लिए कार्यकाल की औपचारिक शुरुआत का आधार मानी जाती है।