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हिमाचल प्रदेश / उत्तर भारत के सबसे लंबे केबल स्टेड ब्रिज को पर्यावरण मंत्रालय की मंजूरी, जानें पूरी जानकारी

हिमाचलनाउ डेस्क | 25 फ़रवरी 2025 at 8:50 am

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Himachalnow / ऊना

हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में गोबिंद सागर झील पर लठियाणी से बिहडू तक प्रस्तावित उत्तर भारत के सबसे लंबे 860 मीटर फोरलेन केबल स्टेड और वायाडक्ट पुल के निर्माण को पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से प्रथम चरण की मंजूरी मिल गई है। इस पुल के बनने से क्षेत्र के लोगों को आवागमन में बड़ी राहत मिलेगी और दूरी के साथ समय की भी बचत होगी।

परियोजना की विशेषताएं:

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  • पुल की लंबाई: 860 मीटर (480 मीटर केबल स्टेड + 380 मीटर वायाडक्ट)
  • फोरलेन सड़क: पुल के दोनों छोर पर कुल आठ किलोमीटर लंबी फोरलेन का निर्माण
  • अन्य ढांचे: 50 मीटर का माइनर पुल, 150 मीटर का वायाडक्ट पुल, 2 व्हीकल ओवरपास और 2 व्हीकल अंडरपास
  • कुल लागत: 897 करोड़ रुपये

पर्यावरणीय और भूमि स्वीकृति:
पुल निर्माण के लिए वन भूमि से 380 पेड़ों की कटाई की अनुमति मिल चुकी है, जबकि सरकारी और निजी भूमि पर मौजूद 3,688 पेड़ों की कटाई के लिए अभी मंजूरी लंबित है। कुल 4,068 पेड़ों के काटे जाने की योजना है। मुआवजे और अन्य औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद परियोजना को द्वितीय चरण की मंजूरी दी जाएगी।

यातायात में सुधार:
पुल बनने के बाद हमीरपुर-ऊना वाया बड़सर मार्ग की दूरी 80 किलोमीटर से घटकर 59 किलोमीटर रह जाएगी, जिससे यात्रियों का 40 मिनट का समय बचेगा। वर्तमान में लठियाणी से बिहडू जाने के लिए लोगों को बंगाणा होकर लंबा रास्ता तय करना पड़ता है या मोटरबोट का सहारा लेना पड़ता है।

स्थानीय गांवों पर प्रभाव:
यह परियोजना कुल 14 गांवों से होकर गुजरेगी, जिससे क्षेत्र के लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। पुल गोबिंद सागर झील के दोनों किनारों पर बसे अलयाना और बदघर को भी आपस में जोड़ेगा।

निर्माण प्रक्रिया और अगला कदम:
परियोजना के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और तीन प्रमुख कंपनियां इस दौड़ में हैं। बीबीएमबी से क्लीयरेंस पहले ही मिल चुकी है। अब द्वितीय चरण की मंजूरी के बाद निर्माण कार्य की औपचारिक शुरुआत होगी।

साइट इंजीनियर का बयान:
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के साइट इंजीनियर सुशील ठाकुर ने बताया, “लठियाणी से बिहडू तक प्रस्तावित पुल के निर्माण के लिए वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से प्रथम चरण की मंजूरी मिल चुकी है। इस प्रोजेक्ट के लिए कुल 380 पेड़ वन भूमि से कटेंगे।”

इस पुल के निर्माण से न केवल परिवहन सुविधा में सुधार होगा, बल्कि हिमाचल प्रदेश के आर्थिक और सामाजिक विकास में भी तेजी आएगी।

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