Loading...

हिमाचल में सीएम सुक्खू ने राजीव गांधी डे-बोर्डिंग स्कूलों की स्थापना तेज करने के दिए निर्देश

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन2 • 5 Hours Ago • 1 Min Read

प्रदेश सरकार प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में राजीव गांधी राजकीय आदर्श डे-बोर्डिंग स्कूल स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने शिक्षा विभाग को इन परियोजनाओं की प्रगति में तेजी लाने और विद्यार्थियों को आधुनिक सुविधाओं सहित गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। इन स्कूलों में प्री-प्राइमरी से लेकर 12वीं कक्षा तक शिक्षा प्रदान करने के साथ स्मार्ट कक्षाएं, खेल सुविधाएं और अन्य आधुनिक आधारभूत ढांचे विकसित किए जाएंगे।

शिमला

डे-बोर्डिंग स्कूलों की स्थापना में तेजी लाने के निर्देश

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने शिक्षा विभाग को राजीव गांधी राजकीय आदर्श डे-बोर्डिंग स्कूलों की स्थापना की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। राज्य सरकार प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में कम से कम एक डे-बोर्डिंग स्कूल स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रही है, ताकि विद्यार्थियों को उनके क्षेत्र के निकट ही आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करवाई जा सके। सरकार का मानना है कि दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के लिए इस प्रकार के संस्थान महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इन स्कूलों के माध्यम से विद्यार्थियों को शैक्षणिक गतिविधियों के साथ-साथ खेल, तकनीकी शिक्षा और सह-पाठयक्रम गतिविधियों का भी अवसर मिलेगा।

आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगे स्कूल

राजीव गांधी राजकीय आदर्श डे-बोर्डिंग स्कूलों में प्री-प्राइमरी से लेकर 12वीं कक्षा तक समग्र शिक्षा प्रदान की जाएगी। इन संस्थानों में स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल लर्निंग सिस्टम, विज्ञान और कंप्यूटर प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, खेल मैदान, इंडोर स्टेडियम, स्विमिंग पूल और अन्य आधुनिक आधारभूत सुविधाएं विकसित की जाएंगी। सरकार का उद्देश्य विद्यार्थियों को निजी शिक्षण संस्थानों के समान सुविधाएं सरकारी स्तर पर उपलब्ध करवाना है। इन स्कूलों में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को ध्यान में रखते हुए खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए भी विशेष प्रावधान किए जाएंगे।

शिक्षा सुधारों पर सरकार का फोकस

प्रदेश सरकार शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए विभिन्न स्तरों पर सुधारात्मक कदम उठा रही है। इसी क्रम में स्कूल शिक्षा निदेशालय और उच्च शिक्षा निदेशालय का गठन किया गया है, ताकि प्रशासनिक कार्यों और शैक्षणिक गतिविधियों का बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया जा सके। इसके अतिरिक्त सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को अंतरराष्ट्रीय शिक्षा प्रणालियों का अध्ययन करने और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों को समझने के लिए विदेशों में एक्सपोजर विजिट पर भेजा जा रहा है। सरकार का उद्देश्य वैश्विक स्तर की शिक्षण पद्धतियों को प्रदेश के सरकारी स्कूलों में लागू करना है, जिससे विद्यार्थियों को प्रतिस्पर्धात्मक वातावरण मिल सके।

विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए नई पहलें

राज्य सरकार मेधावी विद्यार्थियों के लिए भी विभिन्न शैक्षणिक भ्रमण कार्यक्रम संचालित कर रही है। इसके तहत चयनित विद्यार्थियों को देश और विदेश के शैक्षणिक संस्थानों का भ्रमण करवाया जा रहा है, ताकि उन्हें नई तकनीकों और शिक्षा प्रणालियों की जानकारी मिल सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए प्राथमिकता के आधार पर रिक्त पद भरे जा रहे हैं। सरकार का प्रयास है कि किसी भी स्कूल में शिक्षकों की कमी के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो। इसके साथ ही शिक्षकों के प्रशिक्षण और क्षमता विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

सीबीएसई संबद्धता और रैंकिंग में सुधार

प्रदेश सरकार द्वारा 156 सरकारी स्कूलों को सीबीएसई पाठ्यक्रम से संबद्ध करने की प्रक्रिया जारी है। इन स्कूलों में कला, विज्ञान और वाणिज्य संकाय शुरू किए जा रहे हैं, ताकि विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बेहतर तैयारी का अवसर मिल सके। राज्य सरकार के अनुसार शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स 2.0 रिपोर्ट में हिमाचल प्रदेश ने गुणवत्तापूर्ण स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में देशभर में छठा स्थान प्राप्त किया है। इससे पहले राज्य की रैंकिंग 13वें स्थान पर थी। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण 2025 में भी हिमाचल प्रदेश ने उल्लेखनीय सुधार दर्ज करते हुए देश के शीर्ष पांच राज्यों में स्थान बनाया है, जबकि वर्ष 2021 में राज्य 21वें स्थान पर था।

Related Topics: