हिमाचल में धार्मिक पर्यटन सर्किट विकसित करने पर राज्यपाल का जोर, मां ज्वाला देवी मंदिर में किए दर्शन
हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंदर गुप्ता ने राज्य में धार्मिक पर्यटन सर्किट विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि मंदिरों और धार्मिक स्थलों को बेहतर संपर्क और सुविधाओं से जोड़ने से पर्यटन, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।
धर्मशाला
मां ज्वाला देवी मंदिर में राज्यपाल ने किए दर्शन
हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंदर गुप्ता ने मंगलवार को कांगड़ा जिला स्थित मां ज्वाला देवी मंदिर में दर्शन किए। इस दौरान उनकी पत्नी बिंदू गुप्ता भी उनके साथ मौजूद रहीं। मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद राज्यपाल ने प्रदेश और देश की शांति, समृद्धि तथा सामाजिक सद्भाव की कामना की। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण राज्य है और यहां स्थित प्रसिद्ध शक्तिपीठ देश-विदेश के श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं।मीडिया से बातचीत के दौरान राज्यपाल ने हिमाचल प्रदेश में एक समर्पित और सुव्यवस्थित धार्मिक पर्यटन सर्किट विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि राज्य के प्रमुख मंदिरों, शक्तिपीठों, प्राचीन धार्मिक स्थलों और मठों को आधुनिक सुविधाओं और बेहतर सड़क संपर्क के माध्यम से एकीकृत किया जाना चाहिए, ताकि श्रद्धालुओं को यात्रा के दौरान अधिक सुविधा मिल सके।
धार्मिक पर्यटन से रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा समर्थन
राज्यपाल ने कहा कि धार्मिक पर्यटन सर्किट बनने से प्रदेश की आध्यात्मिक पहचान को मजबूती मिलेगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि पर्यटन गतिविधियों के विस्तार से होटल, परिवहन, हस्तशिल्प, स्थानीय व्यापार और अन्य सेवाओं से जुड़े लोगों को भी लाभ मिलेगा। इसके साथ ही प्रदेश की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत के संरक्षण में भी सहायता मिलेगी।उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में ज्वाला देवी, ब्रजेश्वरी देवी, चिंतपूर्णी, नैना देवी और चामुंडा देवी जैसे प्रसिद्ध तीर्थस्थल मौजूद हैं। इसके अलावा राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में कई ऐतिहासिक मंदिर और मठ स्थित हैं, जिन्हें पर्यटन दृष्टि से बेहतर ढंग से विकसित किया जा सकता है।
तीर्थयात्रियों के लिए सुविधाएं बढ़ाने की आवश्यकता
राज्यपाल कविंदर गुप्ता ने कहा कि तीर्थयात्रियों और पर्यटकों की सुविधा के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सड़क संपर्क, पार्किंग, स्वच्छता, डिजिटल सूचना प्रणाली और आवासीय सुविधाओं के विकास से धार्मिक पर्यटन को और व्यवस्थित किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि धार्मिक पर्यटन सर्किट के माध्यम से हिमाचल प्रदेश को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर पहचान मिल सकती है।