हिमाचल में अनुसूचित जाति जनजाति विकास निधि विशेष कानून की मांग तेज
Himachalnow / ऊना / वीरेंद्र बन्याल
ऊना में सामाजिक न्याय यात्रा के तहत प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति विकास निधि के लिए विशेष कानून बनाने की मांग रखी गई।प्रतिनिधियों ने कहा कि यह मांग लंबे समय से उठाई जा रही है और कानूनी प्रावधान आवश्यक है ताकि निधि का उपयोग निर्धारित वर्गों के लिए सुनिश्चित हो सके।
ऊना
सामाजिक न्याय यात्रा का प्रथम चरण समापन की ओर
प्रेस कॉन्फ्रेंस में जानकारी दी गई कि 1 अप्रैल को चंबा के डलहौजी विधानसभा क्षेत्र से शुरू हुई सामाजिक न्याय यात्रा का प्रथम चरण जिला ऊना के संतोषगढ़ में कल समापन होगा। इस यात्रा के माध्यम से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति विकास निधि को लेकर राज्य स्तर पर जनजागरूकता और नीतिगत मांगों को आगे बढ़ाया जा रहा है।
विकास निधि कानून को लेकर लंबे समय से मांग
प्रतिनिधियों ने बताया कि हिमाचल प्रदेश में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति विकास निधि के लिए विशेष कानून बनाए जाने की मांग वर्ष 2012 से उठाई जा रही है। उनका कहना था कि पिछले तीन वर्षों से इस विषय पर राज्य सरकार के साथ लगातार पैरवी की जा रही है, ताकि इस निधि का उपयोग स्पष्ट कानूनी ढांचे के तहत सुनिश्चित किया जा सके और इसे अन्य कार्यों में डायवर्ट होने से रोका जा सके।
नीतिगत घोषणाओं और राजनीतिक संदर्भ का उल्लेख
प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी कहा गया कि पूर्व में विभिन्न मंचों पर इस विषय को लेकर घोषणाएं की गई थीं, जिनमें आबादी के अनुपात में बजट आवंटन और कानूनी प्रावधान की बात शामिल रही है। प्रतिनिधियों ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अधिवेशन में लिए गए न्याय संकल्प का भी उल्लेख किया, जिसमें देशभर में इस तरह के प्रावधानों को लागू करने की बात कही गई थी।
शिक्षा, रोजगार और भूमि संबंधी अपेक्षाएं
प्रतिनिधियों के अनुसार यदि यह कानून लागू होता है तो इससे अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए शिक्षा क्षेत्र में स्कॉलरशिप, रोजगार के अवसर और भूमिहीन परिवारों के लिए भूमि उपलब्ध कराने जैसे विषयों पर प्रभावी कार्य संभव होगा। उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य केवल बजट आवंटन नहीं बल्कि उसके प्रभावी और पारदर्शी उपयोग को सुनिश्चित करना है।