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शिमला में कमला नेहरू अस्पताल से गायनी वार्ड शिफ्ट करने के फैसले पर विरोध, भाजपा ने अस्पताल के बाहर उठाए सवाल

PRIYANKA THAKUR • 1 Hour Ago • 1 Min Read

Himachalnow / शिमला

कमला नेहरू अस्पताल शिमला से गायनी वार्ड को आईजीएमसी शिफ्ट करने के प्रस्ताव को लेकर विभिन्न स्तरों पर विरोध दर्ज किया जा रहा है, जिसमें संगठनों के साथ अब राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है।भाजपा ने अस्पताल के बाहर प्रदर्शन कर कहा कि इस निर्णय से स्वास्थ्य सेवाओं के समन्वय पर प्रभाव पड़ सकता है।

शिमला

गायनी वार्ड शिफ्टिंग के फैसले पर बढ़ा विरोध
शिमला के कमला नेहरू अस्पताल (केएनएच) से गायनी वार्ड को आईजीएमसी शिफ्ट करने के प्रस्ताव को लेकर लगातार विरोध सामने आ रहा है। इस मुद्दे को सबसे पहले जनवादी महिला समिति द्वारा उठाया गया था, जिसके बाद अब राजनीतिक स्तर पर भी इस पर प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। भाजपा ने भी इस निर्णय पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि अस्पताल से जुड़ी सेवाओं में बदलाव से पहले सभी संबंधित पक्षों से विचार-विमर्श किया जाना आवश्यक है, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता और पहुंच पर कोई प्रभाव न पड़े।

अस्पताल के बाहर भाजपा का प्रदर्शन
भाजपा जिला शिमला इकाई ने इस फैसले के विरोध में कमला नेहरू अस्पताल के बाहर धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान पार्टी पदाधिकारियों ने कहा कि सरकार को इस निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए और स्थानीय स्तर पर लोगों की राय को भी ध्यान में रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े मामलों में निर्णय लेते समय क्षेत्रीय आवश्यकताओं और मरीजों की सुविधा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

अस्पताल की सुविधाओं का दिया हवाला
भाजपा जिला अध्यक्ष केशव चौहान ने कहा कि कमला नेहरू अस्पताल लंबे समय से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहा है और यहां कई आवश्यक सुविधाएं पहले से उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया कि अस्पताल में आधुनिक उपकरण जैसे एक्स-रे मशीनें मौजूद हैं और यदि किसी प्रकार की तकनीकी या ढांचागत कमी है तो उसे सुधारने की दिशा में कदम उठाए जाने चाहिए, बजाय इसके कि संबंधित सेवाओं को अन्य संस्थान में स्थानांतरित किया जाए।

सेवाओं के समन्वय पर उठाए सवाल
उन्होंने यह भी कहा कि प्रसव सेवाएं और गायनी से जुड़ी अन्य चिकित्सा सेवाएं आपस में जुड़ी होती हैं, इसलिए इनका अलग-अलग स्थानों पर संचालन समन्वय को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि इस विषय पर व्यापक समीक्षा की जाए और सभी पहलुओं का आकलन करते हुए ही कोई अंतिम निर्णय लिया जाए, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन में संतुलन बना रहे।