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स्कूलों में पढ़ाई का समय बचाने की तैयारी, बाहरी कार्यक्रमों पर लग सकती है पाबंदी

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन • 1 Hour Ago • 1 Min Read

हिमाचल के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने से बचाने के लिए अब स्कूल परिसर में होने वाले गैर-शैक्षणिक कार्यक्रमों को सीमित करने की तैयारी है। शिक्षा विभाग की ओर से ऐसे आयोजनों पर रोक लगाने का प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है, जिनके कारण नियमित कक्षाएं प्रभावित होती हैं।

नाहन

मुख्यमंत्री-मंत्रियों के कार्यक्रमों के अलावा सामाजिक संस्थाओं के आयोजनों को भी दायरे में लाने का प्रस्ताव, शिक्षा विभाग ने सरकार को भेजा प्रस्ताव। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार यह व्यवस्था केवल सामाजिक संस्थाओं के कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि स्कूलों में आयोजित होने वाले विभिन्न गैर-शैक्षणिक आयोजनों की भी समीक्षा की जाएगी। विभाग का उद्देश्य है कि विद्यार्थियों का अधिक से अधिक समय कक्षा में शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में लगे और अनावश्यक आयोजनों के कारण पढ़ाई का नुकसान न हो।

31 तरह की गतिविधियों से प्रभावित हो रहा शिक्षण समय

स्कूलों में आयोजित होने वाली विभिन्न गतिविधियों को लेकर विभाग ने यह भी आकलन किया है कि शिक्षकों और विद्यार्थियों का काफी समय इन आयोजनों की तैयारियों में चला जाता है। इनमें जागरूकता अभियान, प्रशिक्षण, प्रतियोगिताएं, स्वच्छता एवं अन्य गतिविधियां शामिल हैं।

विभाग की ओर से स्कूलों में होने वाली गतिविधियों को लेकर विस्तृत जानकारी जुटाने और उनके प्रभाव का आकलन करने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। इसके आधार पर स्कूलों में गैर-शैक्षणिक गतिविधियों को लेकर नई व्यवस्था लागू की जा सकती है।

कार्यक्रमों से ज्यादा जरूरी नियमित कक्षाएं

प्रस्ताव के पीछे मुख्य जोर इस बात पर है कि स्कूलों में विद्यार्थियों की नियमित पढ़ाई बाधित न हो। विभाग का मानना है कि किसी भी बाहरी आयोजन या गतिविधि के कारण यदि कक्षाएं प्रभावित होती हैं तो इसका सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ता है।

नई व्यवस्था लागू होने की स्थिति में स्कूलों को कार्यक्रम आयोजित करने से पहले निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करना पड़ सकता है। वहीं, सामाजिक संस्थाओं और अन्य संगठनों की ओर से स्कूल परिसरों में करवाए जाने वाले कार्यक्रम भी तय प्रक्रिया के दायरे में आ सकते हैं।

शिक्षा विभाग की ओर से तैयार प्रस्ताव पर सरकार के स्तर पर निर्णय लिया जाना है। इसके बाद ही स्पष्ट होगा कि स्कूलों में किन गतिविधियों पर रोक लगेगी और किन कार्यक्रमों को अनुमति दी जाएगी।