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हिमाचल में विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए एक प्रतिशत ब्याज पर मिल रहा 20 लाख तक ऋण

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन2 • 5 Hours Ago • 1 Min Read

प्रदेश सरकार उच्च शिक्षा और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के लिए विद्यार्थियों को रियायती ब्याज दर पर ऋण सुविधा उपलब्ध करवा रही है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा क्षेत्र में विभिन्न सुधार लागू कर रही है और विद्यार्थियों को डॉ. वाई.एस. परमार विद्यार्थी ऋण योजना का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया।

शिमला

विद्यार्थियों को रियायती ब्याज पर ऋण सुविधा उपलब्ध

पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना से लाभान्वित अनुसूचित जनजातीय क्षेत्र के 21 विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू से मुलाकात कर अपने शैक्षणिक अनुभव साझा किए। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार डॉ. वाई.एस. परमार विद्यार्थी ऋण योजना के तहत विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा और विभिन्न व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के लिए 20 लाख रुपये तक का शिक्षा ऋण मात्र एक प्रतिशत ब्याज दर पर उपलब्ध करवा रही है। उन्होंने कहा कि इस योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और दूरदराज क्षेत्रों के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के अवसर उपलब्ध करवाना है ताकि वे वित्तीय बाधाओं के बिना अपने शैक्षणिक और व्यावसायिक लक्ष्य हासिल कर सकें। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से इस योजना का अधिकतम लाभ उठाने और प्रतिस्पर्धी शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने का आह्वान किया।

शिक्षा क्षेत्र में किए गए विभिन्न सुधार

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में संरचनात्मक और शैक्षणिक सुधारों पर विशेष ध्यान दिया है ताकि विद्यार्थियों को उनके घरों के निकट गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो सके। उन्होंने बताया कि प्रदेश के 156 से अधिक सरकारी स्कूलों में सीबीएसई पाठ्यक्रम लागू किया गया है, जहां विद्यार्थियों को कला, विज्ञान और वाणिज्य संकायों में शिक्षा प्रदान की जा रही है। उन्होंने कहा कि इन स्कूलों में आधुनिक शिक्षण पद्धति, विषय आधारित अध्ययन और प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की तैयारी को ध्यान में रखते हुए शैक्षणिक ढांचे को मजबूत किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी शहरी क्षेत्रों के समान शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध हों।

राष्ट्रीय सर्वेक्षण में प्रदेश की स्थिति में सुधार

मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा क्षेत्र में किए गए सुधारों और नीतिगत प्रयासों के परिणामस्वरूप हिमाचल प्रदेश की स्थिति राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर हुई है। उन्होंने बताया कि हाल ही में किए गए एक राष्ट्रीय सर्वेक्षण में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के मामले में प्रदेश 13वें स्थान से बढ़कर 6वें स्थान पर पहुंचा है। उन्होंने कहा कि यह सुधार स्कूल शिक्षा, पाठ्यक्रम विस्तार, शिक्षण गुणवत्ता और आधारभूत सुविधाओं में किए गए कार्यों का परिणाम है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार ने सामाजिक सुधारों के तहत बेटियों की विवाह योग्य आयु को लड़कों के समान 18 वर्ष से बढ़ाकर 21 वर्ष करने का निर्णय लागू किया है, जिससे शिक्षा और कौशल विकास के लिए अधिक अवसर उपलब्ध हो सकें।

अनुसूचित जनजाति गरिमा उत्सव का आयोजन

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में अनुसूचित जनजाति समुदाय की शिक्षा, संस्कृति और सामाजिक योगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से 10 मई से 9 जून 2026 तक अनुसूचित जनजाति गरिमा उत्सव आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस अवधि के दौरान विभिन्न शैक्षणिक, सांस्कृतिक और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनके माध्यम से जनजातीय समुदाय की भूमिका और योगदान को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत किया जाएगा। इस अवसर पर शिक्षा सचिव राकेश कंवर, उच्च शिक्षा निदेशक हरीश कुमार सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

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